डॉ. नीरज गजेंद्र

डॉ. नीरज गजेंद्र

फाउंडर

डॉ. नीरज गजेंद्र, एक प्रखर सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक, स्वतंत्र पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया उद्यमी हैं। जो समकालीन भारत में जमीनी पत्रकारिता और वैकल्पिक मीडिया के प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से आने वाले डॉ. नीरज ने अपनी पहचान एक ऐसे पत्रकार के रूप में स्थापित की है, जो सत्ता और समाज के बीच संवाद की सशक्त कड़ी बनने का प्रयास करते हैं। वे डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म कीर्तिमान के संस्थापक हैं, जिसके माध्यम से वे वेब, यूट्यूब एवं विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर तथ्यपरक, निष्पक्ष और जनपक्षीय कंटेंट प्रस्तुत करते हैं। उनकी पत्रकारिता का मूल आधार जमीनी मुद्दों की पड़ताल, राजनीतिक परिदृश्य का गहन विश्लेषण तथा सामाजिक सरोकारों पर स्पष्ट और निर्भीक दृष्टिकोण है। डॉ. नीरज की कार्यशैली ही उन्हें मुख्यधारा की मीडिया से अलग पहचान दिलाती है। आप घटनाओं की रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं रहते, उनके पीछे के सामाजिक, राजनीतिक और नीतिगत आयामों को समझने और समझाने पर जोर देते हैं। यही कारण है कि उनका विश्लेषण व्यापक जनमानस, विशेषकर युवाओं और जागरूक पाठकों के बीच विश्वसनीयता और प्रभाव के साथ स्वीकार किया जाता है। एक डिजिटल मीडिया उद्यमी के रूप में उन्होंने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का कार्य किया है। उनका प्रयास है कि छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों की आवाज भी उसी मजबूती से सामने आए, जैसे महानगरों की खबरों में आती हैं। वे पत्रकारिता को पेशा के बजाए सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का माध्यम मानते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ वे जन-जागरूकता, सामाजिक संवाद और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए निरंतर सक्रिय हैं। वे छत्तीसगढ़ शासन से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार भी हैं।

11 लेख
संपादकीय लेख
सैर या संकट : अनजान जगहों पर एक छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ा हादसा
04 मई, 2026

सैर या संकट : अनजान जगहों पर एक छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ा हादसा

डॉ. नीरज गजेंद्र मध्यप्रदेश के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे ने एक बार फिर हमें झकझोर कर रख दिया है। घूमना-फिरना, नई जगहें देखना, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, ये सब जीवन का जरूरी हिस्सा है। लेकिन सवाल यह है कि क्...

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सियासी धर्म : राह चुनने से पहले सच और स्वार्थ की पहचान आवश्यक
27 अप्रैल, 2026

सियासी धर्म : राह चुनने से पहले सच और स्वार्थ की पहचान आवश्यक

मौसम का तापमान भले ही हर साल बढ़ता-घटता रहता हो, लेकिन आज देश की राजनीति का पारा जिस तरह चढ़ा हुआ है, वह मौसम का असर नहीं, बदलते राजनीतिक संस्कारों का संकेत है। हाल के दिनों में दल-बदल की जो घटनाएं खासतौर पर आम आदमी पार्...

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भीड़ की तालियों से आगे अपनी पहचान गढ़ने और जीत देखने का साहस
21 अप्रैल, 2026

भीड़ की तालियों से आगे अपनी पहचान गढ़ने और जीत देखने का साहस

भीड़ हमेशा आपको हौंसला देती है। आपके हर छोटे कदम पर ताली बजाती है। आपको यह एहसास दिलाती है कि आप सही रास्ते पर हैं। ...लेकिन एक गहरी सच्चाई यह भी है कि यही भीड़ धीरे-धीरे आपकी अलग पहचान को निगल जाती है। जब आप भीड़ का हिस...

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वाद से नहीं, समन्वय से जन्म लेता है सत्य, महान दार्शनिक हेगेल के विचार पर पढ़िए विशेष आलेख
13 अप्रैल, 2026

वाद से नहीं, समन्वय से जन्म लेता है सत्य, महान दार्शनिक हेगेल के विचार पर पढ़िए विशेष आलेख

आज एक राष्ट्रीय अखबार में जर्मन दार्शनिक जार्ज विल्हेल्म हेगेल का यह विचार सत्य वाद-विवाद में नहीं, उस सामंजस्य में है, जो इन दोनों के मेल से उत्पन्न होता है। पढ़ा, वास्तव में यह संदेश मानव चिंतन की एक गहरी दिशा को उद्घाट...

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महाभारत : मानवता की परीक्षा और धैर्य का धर्म
06 अप्रैल, 2026

महाभारत : मानवता की परीक्षा और धैर्य का धर्म

आज का वैश्विक परिदृश्य एक गहरी बेचैनी से भरा हुआ है। कहीं प्रत्यक्ष, तो कहीं युद्ध की आशंका बनी हुई है। आज दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां हर दिशा से अशांति की खबरें हैं। अमेरिका की रणनीतिक सक्रियता, अफगानिस्तान मे...

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मुफ्त के कंबल और नंगी होती आत्मा का सच
29 मार्च, 2026

मुफ्त के कंबल और नंगी होती आत्मा का सच

डॉ. नीरज गजेंद्र मैं आज भारत के दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी खबरें पढ़ रहा था, तो मुझे एक कहानी का स्मरण हो आया। भले ही वह पुरानी है, पर अर्थ बिल्कुल नया है। कहानी शायद आपने भी पढ़ी-सुनी या देखी होंगी, जिसमें ...

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सूरज अंधेरे से नहीं लड़ता, वह बस चमकता है और अंधेरा खुद ही खत्म हो जाता है
29 मार्च, 2026

सूरज अंधेरे से नहीं लड़ता, वह बस चमकता है और अंधेरा खुद ही खत्म हो जाता है

डॉ. नीरज गजेंद्र आपने सुना होगा, बदले की आग दूसरे को जलाने से पहले खुद को राख कर जाती है। अफसोस! आजकल हर तरफ यही आग फैली दिखती है। ऐसा लगता है कि लोग इसी आग में जीने लगे हैं। अख़बार उठाइए, टीवी देखिए, सोशल मीडिया स्क्...

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हर पुराना रिश्ता भरोसेमंद नहीं
28 मार्च, 2026

हर पुराना रिश्ता भरोसेमंद नहीं

डॉ. नीरज गजेंद्र भेड़ियों के एक झुंड पर जब शेर ने अचानक हमला किया, तो पूरा झुंड भय से कांप उठा। जीवन और मृत्यु के उस निर्णायक क्षण में मंगल नाम का एक भेड़िया साहस के साथ आगे आया। उसने अपने साथियों से कहा कि तुम सब भाग...

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अहंकार की आग में जलता संवाद और राख बनता अस्तित्व
20 मार्च, 2026

अहंकार की आग में जलता संवाद और राख बनता अस्तित्व

डॉ. नीरज गजेंद्र बहुत पुरानी बात है। एक पक्षी था भारूंड। उसके दो सिर थे, पर शरीर एक ही। दोनों सिरों की अपनी-अपनी सोच, अपनी-अपनी जिद, अपनी-अपनी पहचान। समस्या यह नहीं थी कि वे अलग सोचते थे; समस्या यह थी कि वे साथ सोच नह...

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