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सियासत : क्या केजरीवाल का ‘सबसे भरोसेमंद’ सांसद ही निकला सूत्रधार

एक इंटरव्यू में विक्रम साहनी ने दावा किया कि उन्होंने खुद अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था। उनके मुताबिक, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि कुछ सांसद इस्तीफा देते हैं तो दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक संख्या जुटाना आसान हो जाएगा।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 26 Apr 2026, 05:43 PM · अपडेट: 03 Oct 2026, 03:24 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति इन दिनों एक नए विवाद के केंद्र में आ गई है। पार्टी छोड़ने वाले राज्यसभा सांसद विक्रम साहनी के दावों ने न सिर्फ नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष simmer कर रहा था।

एक इंटरव्यू में साहनी ने दावा किया कि उन्होंने खुद अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था। उनके मुताबिक, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि कुछ सांसद इस्तीफा देते हैं तो दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक संख्या जुटाना आसान हो जाएगा। साहनी के इन बयानों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पार्टी नेतृत्व को पहले से अंदरूनी टूट की जानकारी थी? हालांकि, इन दावों पर अब तक AAP नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 

भरोसेमंद से बागी की कहानी

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि साहनी को पार्टी नेतृत्व के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था। ऐसे में उनका इस तरह खुलकर सामने आना AAP के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। साहनी ने यह भी दावा किया कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को समय के साथ किनारे कर दिया गया, जिससे असंतोष बढ़ा। खासकर चुनावी हार के बाद संगठन में बदलाव और नई टीम के उभार ने पुराने नेताओं में नाराजगी पैदा की।

 AAP का पलटवार

AAP नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “राजनीतिक साजिश” बताया है। पार्टी का कहना है कि जनादेश के साथ किसी भी तरह का विश्वासघात स्वीकार नहीं किया जाएगा। साहनी ने संकेत दिए हैं कि यह मामला कानूनी मोड़ ले सकता है और जरूरत पड़ने पर संवैधानिक संस्थाओं तक भी जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य जनता की सेवा है।

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