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JCB से उठा कर सुअरों को ले जाते
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स्वाइन फीवर : दुर्ग के पिगफार्म में सैंकड़ों सुअरों की तड़प-तड़पकर मौत,  घबराएं नहीं मनुष्य को प्रभावित नहीं करेगी यह बीमारी

छत्तीसगढ़ में सुअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सुअर यहां लाए जाते हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह वायरस नोट और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि इस बीमारी का असर इंसानों पर नहीं होता, लेकिन संक्रमित सुअर का मांस खाने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि वायरस गर्मी में नष्ट हो जाता है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 07 Apr 2026, 11:39 AM · अपडेट: 18 Sep 2026, 03:31 AM
दुर्ग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ में जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित सुअर फार्म में इस वायरस के कारण 300 से अधिक सूअरों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने बची हुई करीब 150 सूअरों को भी जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी को प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया। इस वायरस से फार्म मालिक को करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।
जानकारी के अनुसार सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम मुडपार गांव पहुंची थी। अधिकारी और डॉक्टर पीपीई किट पहनकर फार्म के अंदर गए और बचे हुए सुअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया। इसके बाद फार्म के पीछे मृत सुअरों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया।
फिलहाल पूरे फार्म को सील करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि मुडपार गांव सुअर पालन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर सुअर पालन किया जा रहा था। इस फार्म से न केवल दुर्ग-भिलाई, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी पोर्क की सप्लाई की जा रही थी।
रिपोर्ट के आने तक 300 सूअरों की मौत
फार्म मालिक पीओ जॉय ने बताया कि उनके फार्म में कुल 300 से 400 सूअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया था, जबकि 1 अप्रैल से सुअरों की मौत शुरू हो गई। 6 अप्रैल तक करीब 300 सुअरों की मौत हो चुकी थी और बाकी को विभाग ने इंजेक्शन दे कर मार दिया।
भारी नुकसान 
उन्होंने बताया कि एक सुअर की कीमत लगभग 30 हजार रुपए थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। फार्म में 133 गर्भवती सुअर और करीब 400 बच्चे भी थे। सोमवार को सभी को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया और फार्म के पीछे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया।
सूअरों में ही फैलती है ए बीमारी 
पीओ जॉय ने बताया कि उन्होंने खुद ही विभाग को सूचना देकर बुलाया था, ताकि बीमारी और अधिक न फैल सके। उन्होंने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक पुरानी और बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका अभी तक दुनिया में कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है।
यह बीमारी लगने के बाद लगभग सभी सुअरों की मौत हो जाती है। हालांकि यह केवल सुअरों में ही फैलती है और इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करती।
संक्रमित सूअर का मांस खाने से बचे 
फार्म मालिक का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सुअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सुअर यहां लाए जाते हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि यह वायरस नोट और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि इस बीमारी का असर इंसानों पर नहीं होता, लेकिन संक्रमित सूअर का मांस खाने से बचना चाहिए।
उनका कहना है कि वायरस गर्मी में नष्ट हो जाता है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है।
संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोके 
फार्म मालिक ने कहा किऐसी गंभीर बीमारी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोका जा सके। यदि समय रहते कदम उठाए जाते, तो नुकसान कम हो सकता था।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने नुकसान से ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह बीमारी अन्य फार्म तक न फैले।
गड्डे में दफनाया 
रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शुरू हुई कार्रवाई
पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने बताया कि 2 अप्रैल को सूचना मिलने के बाद तुरंत सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजा गया था। सोमवार सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
इसके बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी गई। फिलहाल पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए फार्म को सील करने की कार्रवाई की जा रही है।
छत्तीसगढ़ के मामले की मुख्य बातें
  • दुर्ग जिला के नारधा-मुडपार गांव में संक्रमण की पुष्टि हुई।
  • 300+ सुअरों की पहले ही मौत हो चुकी थी।
  • बचाव के लिए करीब 150 सूअरों को कंट्रोल्ड किलिंग (culling) के तहत मारा गया।
  • पूरे फार्म को सील किया जा रहा है ताकि वायरस आगे न फैले।
  • फार्म मालिक को लगभग ₹1.2 करोड़ का नुकसान हुआ।
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