छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से वन्यजीव अपराध की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। गीदम रेंज के गुमलनार इलाके में वन विभाग की टीम ने तेंदुए के शिकार और उसकी खाल की तस्करी के मामले में पांच आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इन शिकारियों ने न केवल एक बेजुबान तेंदुए की बेरहमी से हत्या की, बल्कि उसके मांस को पकाकर खा भी गए।
ग्राहक बनकर पहुंची वन विभाग की टीम
इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व बचेली रेंजर डॉ. प्रीतेश पांडेय ने किया। DFO रंगनाधा रामाकृष्णा वाय को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग तेंदुए की खाल बेचने के लिए ग्राहकों की तलाश कर रहे हैं। इसके बाद विभाग ने एक सोची-समझी रणनीति तैयार की। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी खुद 'फर्जी ग्राहक' बनकर शिकारियों से सौदा करने पहुंचे। जैसे ही सौदा तय हुआ और शिकारी खाल दिखाने आए, घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुंदरलाल, धरमू सिमरथ, दियालू, दिनेश कश्यप और गोबरु के रूप में हुई है।
बेरहमी से दिया गया वारदात को अंजाम
जांच में खुलासा हुआ कि शिकारियों ने तेंदुए को मारने के लिए बेहद क्रूर तरीका अपनाया। गर्मी के मौसम में वन्यजीव अक्सर पानी की तलाश में नदी किनारे आते हैं। शिकारियों ने इसी का फायदा उठाते हुए नदी के पास एक लोहे का फंदा (जाल) बिछाया था। करीब 6 से 7 साल की उम्र का एक तेंदुआ इस फंदे में फंस गया।
जब शिकारी मौके पर पहुंचे, तो तेंदुआ जीवित था और संघर्ष कर रहा था। आरोपियों ने उस पर दया दिखाने के बजाय कुल्हाड़ी से उसके सिर पर ताबड़तोड़ वार किए और उसे मार डाला। हत्या के बाद शिकारियों ने तेंदुए की खाल उतार ली और उसके मांस को आपस में बांटकर खा लिया। वे केवल खाल को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने की फिराक में थे।

कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी
पकड़े गए सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इस कानून के तहत तेंदुए जैसे लुप्तप्राय जीवों का शिकार करना एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें लंबी जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
"वन्यजीव हमारी प्राकृतिक संपदा हैं और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए इनका जीवित रहना अनिवार्य है। शिकारियों ने जिस तरह की क्रूरता दिखाई है, वह अक्षम्य है। विभाग ऐसे अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है और भविष्य में भी ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।" — डॉ. प्रीतेश पांडेय, रेंजर
इस कार्रवाई ने क्षेत्र के अन्य तस्करों और शिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को दें।
