महासमुंद शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ कलेक्टर कार्यालय ने एक बार फिर जाँच का आदेश जारी किया है। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) लीलाधर सिन्हा के विरुद्ध शिक्षकों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोपों के बाद तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। लेकिन सर्व शिक्षक संघ ने इस नई कमेटी को प्रशासन की 'बचाओ रणनीति' करार देते हुए पुरानी समिति का क्या हुआ? प्रशासन पर उठे सवाल
शिक्षक संगठनों का कहना है कि भ्रष्टाचार को दबाने का यह खेल पुराना है। 8 महीने पहले भी जिला कोषालय अधिकारी की अध्यक्षता में एक जाँच समिति बनाई गई थी। जिसमे 15 दिवस के भीतर रिपोर्ट पर कर कार्यवाही का उल्लेख जारी आदेश में था लेकिन विडंबना यह है कि उस समिति ने महीनों बीत जाने के बाद भी जाँच की एक ईंट तक नहीं सरकाई।
जांच समिति को 3 बार स्मरण पत्र
सर्व शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन के माध्यम से चर्चा करने पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 8 माह के भीतर जाँच समिति को 3 बार स्मरण पत्र जारी हुआ तो भी आज तक कोषालय अधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति उस कलेक्टर महासमुंद द्वारा गठित समिति नजर अंदाज करते हुए जाँच प्रारंभ नहीं किये है और विकासखंड शिक्षा अधिकारी के बचाव में खड़ा प्रतीत हो रहा है। शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि जब जिला कोषालय अधिकारी वाली समिति ने कोई ठोस रिपोर्ट नहीं दी, तो अब नई कमेटी बनाकर केवल मामले को लटकाने और बीईओ को संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है।
भ्रष्टाचार के 'छह अध्याय' जिनकी जाँच होनी है
कलेक्टर द्वारा जारी ताजा आदेश में बीईओ सिन्हा के खिलाफ निम्नलिखित छह बिंदुओं पर जाँच के निर्देश दिए गए हैं:
- संतान पालन अवकाश (CCL) में अवैध वसूली: अवकाश स्वीकृत करने के नाम पर शिक्षिकाओं से पैसों की मांग।
- स्टेशनरी वितरण घोटाला: 3 साल से स्कूलों को सामग्री नहीं मिली, जबकि रिकॉर्ड में वितरण दिखा दिया गया।
- फर्जी बिलों के जरिए आहरण: कार्यालय व्यय की राशि का दुरुपयोग और फर्जी बिलों का खेल।
- नियम विरुद्ध यात्रा भत्ता (TA): प्यून के साथ मोटरसाइकिल पर दौरा कर लाखों का फर्जी टीए आहरित करना.
- पक्षपातपूर्ण रवैया: ऑनलाइन आवेदनों को दरकिनार कर चहेतों को ऑफलाइन छुट्टियां बांटना।
- युक्तियुक्तकरण में लापरवाही: शालाओं के सेटअप और शिक्षकों के समायोजन में व्यापक अनियमितता।
हटाओ वरना सत्याग्रह होगा - शिक्षक संघ का अल्टीमेटम सर्व शिक्षक संघ के पदाधिकारी टेकराम सेन नारायण चौधरी ईश्वर चंद्राकर सिराज बक्श राजेश साहू बाबूलाल ध्रुव कमलनारायण यादव ईश्वर साहू दिलीप तिवारी ने स्पष्ट किया है कि जब तक बीईओ को उनके मूल पद से नहीं हटाया जाता, तब तक निष्पक्ष जाँच संभव नहीं है।
संघ ने आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है:
आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल : यदि जाँच में पुनः टालमटोल की गई तो शिक्षक आमरण अनशनएवं भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
मुख्यमंत्री निवास तक पदयात्रा: आंदोलन के अगले चरण में सत्याग्रह पदयात्रा सीधे राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास तक की जाएगी।
7 दिन की मोहलत: क्या इस बार न्याय मिलेगा?
वर्तमान में गठित समिति (अरुण प्रधान, चमनलाल चन्द्राकर और एच.एल. यादव) को 01 सप्ताह के भीतर प्रतिवेदन सौंपने का आदेश दिया गया है। अब देखना यह है कि क्या यह समिति 8 महीने पहले की समिति की तरह 'सुस्त' रहेगी या फिर भ्रष्टाचार के इस किले को ढहा पाएगी?
समिति गठित
सर्व शिक्षक संघ ने पूर्व में विकासखंड शिक्षा अधिकारी महासमुंद जिस प्रकरण में यह समिति गठित किया गया था उन सभी अधिकारी एवं कर्मचारी के शिक्षा विभाग में हुए अनियमित्ता का जाँच कर पायेगी और निष्पक्ष रिपोर्ट दे पायेगी की नहीं उस स्थिति को भी स्पष्ट करेंगे। हमने इस भ्र्ष्टाचार के खिलाफ बुगुल फूक दिया है अगर समय से पहले निष्पक्ष जाँच कर रिपोर्ट अनुसार कार्यवाही होती है तो जिला प्रशासन का आभारी रहेंगे अन्यथा सर्व शिक्षक संघ का क्रमिक आंदोलन जारी रहेगा।
