छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों ने इस बार पूरे प्रदेश का ध्यान सरायपाली की ओर खींच लिया है। सरायपाली क्षेत्र के एकलव्य अंग्रेजी माध्यम स्कूल, अर्जुंडा की छात्राओं ने सफलता का एक नया इतिहास रचते हुए जिले का गौरव बढ़ाया है। स्कूल की एक-दो नहीं, बल्कि आठ छात्राओं ने प्रदेश की मेरिट सूची (टॉप-10) में अपना स्थान पक्का किया है।
इस गौरवशाली उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि इन सभी छात्राओं ने किसी महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि स्कूल की पढ़ाई और अपनी मेहनत (Self-study) के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
स्वर्ण अक्षरों में दर्ज सफलता: टॉपर्स की गौरव गाथा
अर्जुंडा स्कूल की इन आठ छात्राओं में से दो ने प्रदेश में प्रथम, दो ने द्वितीय, और अन्य छात्राओं ने सातवां, आठवां व दसवां स्थान प्राप्त किया है। जिले भर में इस स्कूल का प्रदर्शन अद्वितीय रहा है।
1. प्रथम स्थान: संध्या नायक और परी रानी प्रधान (99%)
संध्या नायक (ग्राम माधोपाली): 594 अंकों के साथ संध्या ने प्रदेश में पहला स्थान पाया। किसान की बेटी संध्या भविष्य में डिप्टी कमिश्नर बनना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि वे घर के कामों में हाथ बंटाने के बाद रात के समय पढ़ाई करना पसंद करती थीं।
परी रानी प्रधान (ग्राम टेमरी): अर्जुंडा स्कूल की बलौदा शाखा की इस छात्रा ने भी 99% अंक हासिल कर प्रथम स्थान साझा किया। परी रानी रोजाना 9 से 10 घंटे पढ़ती थीं और अब NEET की तैयारी कर डॉक्टर बनने का सपना देख रही हैं।
2. द्वितीय स्थान: रानू सिद्धमयी और रेणुका प्रधान (98.83%)
रानू सिद्धमयी (ग्राम सेमलिया): रानू ने 593 अंक प्राप्त किए। उनके पिता शिक्षक हैं। रानू भविष्य में कलेक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं।
रेणुका प्रधान (ग्राम भूथिया): किसान की बेटी रेणुका ने भी 98.83% अंकों के साथ दूसरा स्थान पाया। वे आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहती हैं।
संघर्ष से सफलता तक: मेरिट लिस्ट के अन्य सितारे
सफलता की यह कड़ी यहीं नहीं रुकी। स्कूल की अन्य मेधावी छात्राओं ने भी अपनी चमक बिखेरी:
चाहत चौधरी (7वां स्थान - 98%): सिंघनपुर की रहने वाली चाहत के पिता डॉक्यूमेंट लेखक हैं। उन्होंने कठिन विषयों को समझने के लिए इंटरनेट और मोबाइल का सही उपयोग किया। वे इंजीनियर बनना चाहती हैं।
टीशा साहू (8वां स्थान - 97.83%): खैरझिटकी निवासी टीशा एक किसान की बेटी हैं। उन्होंने उम्मीद से बढ़कर परिणाम दिया और अब डॉक्टर बनने की राह पर हैं।
भारती चंद्रा व लता चौधरी (10वां स्थान - 97.50%): * भारती के पिता क्रेशर में मजदूरी करते हैं, लेकिन उनकी आंखों में बेटी को प्रशासनिक अधिकारी बनाने का सपना है।
लता चौधरी भी यूपीएससी की तैयारी कर IAS बनने का लक्ष्य रखती हैं।
बिना कोचिंग के 'सेल्फ स्टडी' का जादू
इन परिणामों ने एक बड़ी भ्रांति को तोड़ दिया है कि बड़ी सफलता के लिए महंगी कोचिंग जरूरी है। अर्जुंडा स्कूल की इन बेटियों ने साबित कर दिया कि यदि अनुशासन, सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो घर पर रहकर भी आसमान छुआ जा सकता है। किसी ने अपनी मां के साथ रसोई में काम किया, तो किसी ने खेती-किसानी में पिता का हाथ बंटाया, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनकी एकाग्रता कभी कम नहीं हुई।
क्षेत्र में उत्सव का माहौल
इस ऐतिहासिक परिणाम के बाद सरायपाली और अर्जुंडा क्षेत्र में जश्न का माहौल है। विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और अभिभावकों ने छात्राओं को मिठाई खिलाकर बधाई दी। स्कूल प्रबंधन ने इस सफलता को छात्राओं की कड़ी मेहनत और स्कूल के अनुशासित वातावरण का परिणाम बताया है।
निष्कर्ष: सरायपाली की इन आठ बेटियों ने न केवल अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बावजूद अगर लक्ष्य बड़ा हो, तो सफलता कदम चूमती है। आज पूरा जिला अपनी इन 'लाड़लियों' की सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।
