महासमुंद में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई सामने आई है, जहां एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने ग्राम पंचायत बेमचा के सरपंच देवेन्द्र चंद्राकर को रिश्वतखोरी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सरपंच को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट संदेश दिया है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
यह पूरा मामला महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत बेमचा का है, जहां के वर्तमान सरपंच देवेन्द्र चंद्राकर पर गंभीर आरोप लगे थे।
एसीबी रायपुर कार्यालय में शिकायत
शिकायतकर्ता सूरज राम रात्रे, जो महासमुंद के निवासी हैं, ने एसीबी रायपुर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी के नाम पर ग्राम बेमचा के इन्द्रा कॉलोनी क्षेत्र में आबादी भूमि स्थित है, जिस पर वे निर्माण कार्य कराना चाहते थे।
शिकायत के अनुसार, इस भूमि पर निर्माण के लिए पहले के सरपंच द्वारा एनओसी (No Objection Certificate) जारी कर दी गई थी, जिससे निर्माण कार्य में कोई बाधा नहीं थी।
रिश्वत की मांग
लेकिन जैसे ही नए सरपंच देवेन्द्र चंद्राकर ने पदभार संभाला, उन्होंने पूर्व में जारी एनओसी को निरस्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसी एनओसी को दोबारा जारी करने के नाम पर शिकायतकर्ता से भारी-भरकम रिश्वत की मांग शुरू कर दी।
बताया गया कि आरोपी सरपंच ने शुरुआत में 4 लाख रुपये की मांग की थी। हालांकि बाद में मोलभाव के दौरान यह राशि घटाकर 3.80 लाख रुपये तय की गई। इस सौदे के तहत आरोपी पहले ही 50 हजार रुपये अग्रिम के रूप में ले चुका था। लेकिन शिकायतकर्ता सूरज राम रात्रे रिश्वत देने के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी एसीबी को देने का फैसला किया।
एसीबी की टीम ने किया गिरफ्तार
एसीबी रायपुर की टीम ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले का गंभीरता से सत्यापन किया। जांच के दौरान आरोप सही पाए गए, जिसके बाद अधिकारियों ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक योजनाबद्ध ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया। इस ऑपरेशन के तहत 16 अप्रैल 2026 को शिकायतकर्ता को आरोपी सरपंच के पास 1 लाख रुपये की अगली किस्त देने के लिए भेजा गया।
रंगे हाथों किया गिरफ्तार
जैसे ही सरपंच देवेन्द्र चंद्राकर ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, पहले से मौके पर मौजूद एसीबी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान पूरी प्रक्रिया को विधिवत रिकॉर्ड भी किया गया, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है।
पूछताछ जारी
फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं या यह एक व्यक्तिगत स्तर का मामला है।
एसीबी अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम लगातार जारी रहेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में ऐसे और भी मामलों में सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
क्षेत्र में चर्चा का माहौल
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय क्षेत्र में काफी चर्चा का माहौल है। आम जनता और स्थानीय निवासियों ने एसीबी की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। लोगों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयों से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और आम नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ेगी।
फिलहाल एसीबी की टीम पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी इसी तरह के मामलों में लोगों से अवैध वसूली की है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

