छत्तीसगढ़ के उभरते युवा फिल्मकार एस अंशु धुरंधर ने कम उम्र में ही रचनात्मकता और निरंतर प्रयास के दम पर फिल्म और साहित्य—दोनों क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनानी शुरू कर दी है। सामाजिक सरोकार, ऐतिहासिक विषयों और प्रेरक जीवन कथाओं पर केंद्रित उनके कार्य अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराहे जा रहे हैं। लगातार सृजनात्मक सक्रियता के चलते वे राज्य के उन युवा रचनाकारों में शामिल हो चुके हैं, जिनकी दिशा और दृष्टि पर व्यापक स्तर पर ध्यान दिया जा रहा है।
फिल्म निर्माण में मजबूत पकड़, विषयों में विविधता
एस अंशु धुरंधर ने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘द कुंग फु चाइल्ड’ (2013), ‘द अल्टीमेट कुंग फु चाइल्ड’ (2015), ‘महानीति’ (2017), ‘कर्तव्य की ओर’ (2018) और चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘छत्तीसगढ़ के भीम: चिंताराम’ (2025) शामिल हैं। इन फिल्मों में समाज के विभिन्न पहलुओं, प्रेरक व्यक्तित्वों और क्षेत्रीय इतिहास को केंद्र में रखा गया है। खास बात यह है कि उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ संदेश भी होता है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।

साहित्य में भी समानांतर पहचान
फिल्मों के साथ-साथ धुरंधर ने साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘अधिनायक’ (2022), ‘बाल क्रांतिकारी’ (2022), ‘सरस्वती’ (2024) और ‘चिंताराम’ (2024) शामिल हैं।
इन पुस्तकों में समाज, विचार और प्रेरणा से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई है। उनकी लेखन शैली युवाओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है, जिससे ये रचनाएँ पाठकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
देश से लेकर विदेश तक पहचान
एस अंशु धुरंधर के कार्यों को भारत के अलावा अमेरिका, जमैका, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में भी प्रस्तुत किया जा चुका है। वहीं देश के विभिन्न राज्यों—हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल—में उनके कार्यों का चयन और सम्मान हुआ है। अब तक उन्हें 10 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं, जबकि उनकी फिल्मों का चयन 20 से अधिक फिल्म महोत्सवों में हो चुका है। वर्ष 2025 में वे अमेरिकी मंच पर चयनित होने वाले छत्तीसगढ़ के सबसे युवा फिल्मकार बने—जो राज्य के लिए गौरव की बात मानी जा रही है।
युवाओं के लिए सकारात्मक संदेश पर फोकस
वर्तमान में एस अंशु धुरंधर तीन नई फीचर और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वे दो नई पुस्तकों के लेखन में भी जुटे हैं। इन आगामी रचनाओं का उद्देश्य युवाओं को मानसिक दबाव, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं से उबरने के लिए सकारात्मक सोच और प्रेरणा देना है।
कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां, भविष्य पर नजर
कम उम्र में निरंतर सक्रियता और विविध विषयों पर काम करने की क्षमता ने एस अंशु धुरंधर को छत्तीसगढ़ के उभरते युवा फिल्मकारों की अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा किया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान, पुरस्कार और चयन यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में वे फिल्म और साहित्य की दुनिया में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

