छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने के लिए अब मधुमक्खी पालन (बी-कीपिंग) तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। राज्य सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राज्य योजना के जरिए इस व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है। जशपुर जिले में फिलहाल 20 किसानों को आर्थिक सहायता देकर इस काम से जोड़ा गया है।
3 तरह की सहायता: बॉक्स, छत्ता और मशीन पर अनुदान
योजना के तहत किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए जरूरी संसाधनों पर सब्सिडी दी जा रही है।
- मधुमक्खी पेटी (बी बॉक्स) और कॉलोनी: ₹1600
- मधुमक्खी छत्ता: ₹800
- शहद निकालने की मशीन: ₹8000
इस मदद से किसान कम निवेश में अपना व्यवसाय शुरू कर पा रहे हैं और अतिरिक्त आय कमा रहे हैं।
सिर्फ शहद नहीं, फसलों की पैदावार भी बढ़ती

युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया
पर्यावरण के लिए भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमक्खियां जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि कीटनाशकों के अधिक उपयोग से इनकी संख्या घट रही है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में मधुमक्खी-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना जरूरी है।
साल में कई बार उत्पादन, कम खर्च में ज्यादा फायदा
एक मधुमक्खी बॉक्स से साल में कई बार शहद निकाला जा सकता है। वैज्ञानिक तकनीक और सही देखभाल से उत्पादन बढ़ाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। कुल मिलाकर, मधुमक्खी पालन छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है।
