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ज्ञानभारतम अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वे और डिजिटल संरक्षण कार्य तेज़ी से जारी।
ज्ञानभारतम अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वे और डिजिटल संरक्षण कार्य तेज़ी से जारी।

छत्तीसगढ़ में ‘ज्ञानभारतम’ अभियान को रफ्तार,  4 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सर्वे पूर्ण

छत्तीसगढ़ में “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 26 जिलों में समितियों का गठन हो चुका है और 4191 पांडुलिपियों का सर्वे पूरा किया गया है। संस्कृति विभाग के नेतृत्व में प्रशिक्षित टीमों द्वारा जमीनी स्तर पर सर्वे कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य राज्य की प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर को खोजकर डिजिटल रूप में संरक्षित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक यह अमूल्य ज्ञान सुरक्षित पहुंच सके।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 11 Apr 2026, 05:18 PM · अपडेट: 18 Sep 2026, 03:32 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” छत्तीसगढ़ में तेजी से गति पकड़ रहा है। राज्य में प्राचीन और ऐतिहासिक पांडुलिपियों को खोजने, संरक्षित करने और डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

26 जिलों में समितियों का गठन

मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ की सक्रिय भागीदारी सामने आई है। प्रदेश के 33 जिलों में से अब तक 26 जिलों में जिला स्तरीय समितियों का गठन कर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि शेष 7 जिलों में यह प्रक्रिया जारी है।

जमीनी स्तर पर मजबूत हो रहा सर्वे कार्य

अभियान के तहत जिला स्तर पर लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें पांडुलिपियों का संग्रह करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही ग्राम और क्षेत्र स्तर पर सर्वेक्षकों की नियुक्ति कर जमीनी स्तर पर कार्य को मजबूत किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों तक पहुंच बनाई जा सके।

प्रशिक्षण के जरिए बढ़ाई जा रही गुणवत्ता

संस्कृति विभाग, जो इस अभियान का नोडल विभाग है, ‘ज्ञानभारतम’ के क्षेत्रीय संयोजकों के सहयोग से जिला स्तरीय प्रशिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दे रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सर्वेक्षण कार्य गुणवत्ता और सटीकता के साथ पूरा हो तथा हर महत्वपूर्ण दस्तावेज का सही तरीके से दस्तावेजीकरण किया जा सके।

4 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सर्वे पूर्ण

अभियान की शुरुआत में भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन सर्वेक्षण के विस्तार के साथ अब यह संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में राज्य के 6 जिलों में सर्वेक्षण कार्य सक्रिय रूप से चल रहा है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ‘ज्ञानभारतम एप’ के माध्यम से सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

डिजिटल संरक्षण से सहेजी जाएगी विरासत

यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के इस अमूल्य भंडार को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने का सशक्त माध्यम भी बन रही है।

नई पहचान दिलाएगा अभियान

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान के माध्यम से कई ऐसी दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियाँ सामने आ सकती हैं, जो अब तक अज्ञात थीं। इससे राज्य की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत को नई पहचान मिलने की संभावना है।

परंपरा और तकनीक का संगम

‘ज्ञानभारतम’ अभियान छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक नई क्रांति का संकेत दे रहा है। डिजिटल युग में यह पहल परंपरा और तकनीक के संगम का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है।

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