नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर पलटवार करते हुए उसे पूरी तरह असत्य बताया। उन्होंने कहा कि अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
विष्णु देव साय ने कहा कि दिसंबर 2023 में राज्य में नई सरकार बनने के बाद केंद्र के साथ मिलकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की विस्तृत समीक्षा की गई। उनके अनुसार, उस समय देश के कुल नक्सल प्रभाव का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में केंद्रित था, जिसके बाद रणनीतिक कार्रवाई तेज़ की गई। उन्होंने 31 मार्च 2026 को राज्य के लिए ऐतिहासिक दिन बताते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद राज्य के विकास में लंबे समय से सबसे बड़ी बाधा रहा है और इसके खत्म होने से बस्तर जैसे क्षेत्र अब तेज़ी से विकास की राह पर आगे बढ़ेंगे।
वहीं, इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर गलत बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे इस विषय पर खुली बहस के लिए तैयार हैं। बघेल ने कहा कि उनकी सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए थे, लेकिन वर्तमान में उसके योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर अब श्रेय और जिम्मेदारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
क्या कहा किसने?
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आरोपों को “पूरी तरह असत्य” बताया।
- साय का कहना है कि दिसंबर 2023 में सरकार बनने के बाद केंद्र के साथ मिलकर नक्सल प्रभावित इलाकों की समीक्षा की गई और तेज़ी से कार्रवाई हुई।
- उन्होंने यह भी कहा कि 31 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ के लिए “ऐतिहासिक दिन” है, क्योंकि राज्य से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है।
- साय ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को श्रेय दिया।
बघेल का पलटवार
- भूपेश बघेल ने सीधे अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि वे “झूठ बोल रहे हैं।”
- उन्होंने शाह को खुली बहस की चुनौती दी और कहा कि वे समय, स्थान और मंच तय कर लें।
- बघेल का आरोप है कि उनकी सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ काम किया, लेकिन केंद्र उसका श्रेय नहीं दे रहा।
मुद्दे का सार
- सरकार का दावा: नक्सलवाद लगभग खत्म, केंद्र-राज्य समन्वय से सफलता
- विपक्ष का आरोप: केंद्र गलत बयान दे रहा, पिछली सरकार के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा
- राजनीतिक असर: बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास को लेकर श्रेय की राजनीति तेज़
- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर सियासी टकराव
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आरोपों को “पूरी तरह असत्य” करार दिया। उन्होंने कहा कि बघेल अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए ऐसा बयान दे रहे हैं।
- साय ने बताया कि दिसंबर 2023 में सरकार बनने के तुरंत बाद, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल प्रभावित राज्यों की समीक्षा की थी। इस समीक्षा में सामने आया कि 75% से अधिक नक्सल गतिविधियां छत्तीसगढ़ में थीं।
- सीएम ने 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि राज्य से नक्सलवाद समाप्त हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को 3 करोड़ जनता की ओर से धन्यवाद दिया।
- साय ने कहा कि नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद बस्तर क्षेत्र जो 40 वर्षों से विकास से अछूता था, अब तेजी से विकास करेगा।
- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का खंडन किया जिसमें कहा गया कि बघेल सरकार ने नक्सलवाद खत्म करने में मदद नहीं की।
- बघेल ने कहा कि शाह झूठ बोल रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए और जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने अमित शाह को खुली बहस के लिए चुनौती दी, कहा कि वे जगह, समय और मंच तय करें, वे तैयार हैं।
