📅 Sunday, 03 May 2026 भारत
ब्रेकिंग
अफरा-तफरी : इलेक्ट्रिक स्कूटी में लगी आग, बाल-बाल बचे कई परिवार शिशुपाल पर्वत बना डेथ पॉइंट : प्रशासन मौन, सुरक्षा के नाम पर सिर्फ वसूली सुशासन तिहार 2026 : CM साय का प्रदेशव्यापी दौरा शुरू, गांव-गांव पहुंचकर लेंगे योजनाओं का फीडबैक रेलवे का बड़ा फैसला : अब स्लीपर क्लास में भी मिलेगा AC जैसी सुविधाओं का आनंद, 15 मई से बदल जाएगा सफर का अनुभव RTO में इंटरनेट ठप : मोबाइल हॉटस्पॉट के सहारे चल रहा काम, लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन सब अटके कारण बताओ नोटिस : जनगणना कार्य में लापरवाही पर प्रशासन का डंडा, 23 कर्मचारियों को मांग जवाब अफरा-तफरी : इलेक्ट्रिक स्कूटी में लगी आग, बाल-बाल बचे कई परिवार शिशुपाल पर्वत बना डेथ पॉइंट : प्रशासन मौन, सुरक्षा के नाम पर सिर्फ वसूली सुशासन तिहार 2026 : CM साय का प्रदेशव्यापी दौरा शुरू, गांव-गांव पहुंचकर लेंगे योजनाओं का फीडबैक रेलवे का बड़ा फैसला : अब स्लीपर क्लास में भी मिलेगा AC जैसी सुविधाओं का आनंद, 15 मई से बदल जाएगा सफर का अनुभव RTO में इंटरनेट ठप : मोबाइल हॉटस्पॉट के सहारे चल रहा काम, लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन सब अटके कारण बताओ नोटिस : जनगणना कार्य में लापरवाही पर प्रशासन का डंडा, 23 कर्मचारियों को मांग जवाब
W 𝕏 f 🔗
होम धर्म /ज्योतिष बोधगया में 2570वीं बुद्ध जयंती का भव्य आयोजन, महा…
AI फोटो
AI फोटो
धर्म /ज्योतिष

बोधगया में 2570वीं बुद्ध जयंती का भव्य आयोजन, महाबोधि मंदिर में गूंजे धम्म संदेश

बोधगया स्थित Mahabodhi Temple में 1 मई 2026 को 2570वीं बुद्ध जयंती के अवसर पर भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। थाईलैंड, भूटान, वियतनाम और म्यांमार सहित कई देशों के भिक्षु संघों ने सामूहिक मंत्रोच्चार और धम्म संदेश दिए, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से भर गया। कार्यक्रम में विश्व शांति और बुद्ध के उपदेशों की प्रासंगिकता पर जोर दिया गया।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
01 May 2026, 03:02 PM
📍 बिहार
विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर, बोधगया में आज 1 मई 2026 को 2570वीं बुद्ध जयंती के अवसर पर भव्य मुख्य समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और धम्म प्रवचनों की गूंज सुनाई दी, जहां देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

धम्म सन्देश और अंतरराष्ट्रीय भिक्षु संघ की भागीदारी

मुख्य कार्यक्रम के दौरान मंदिर के प्रधान भिक्षु भिक्षु चालिंदा और बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति  की सदस्य सचिव महाश्वेता महारथी के नेतृत्व में विभिन्न देशों से आए वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं ने धम्म सन्देश  दिए । इस अवसर पर रॉयल भूटान मठ, थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार के भिक्षु संघों ने सामूहिक रूप से मंत्रोच्चार कर भगवान बुद्ध के जीवन और उपदेशों का वाचन किया जायेगा , जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा का वतावरण रहेगा ।

विश्व शांति का संदेश

इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय योग गुरु स्वामी संतोषानंद महाराज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने “विश्व शांति” और “वैश्विक चेतना” पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि बुद्ध का मार्ग आज भी मानवता के लिए सबसे बड़ा समाधान है।

बौद्ध परंपरा और वैश्विक एकता का संगम

बोधगया में आयोजित यह समारोह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक एकता का प्रतीक बन गया है। विभिन्न देशों के भिक्षुओं की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि बुद्ध की शिक्षाएं सीमाओं से परे हैं और पूरी मानवता को जोड़ने का कार्य करती हैं।

आगामी कार्यक्रम

आयोजन समिति के अनुसार, 2 मई 2026 को वाट थाई मगध बौद्ध विपश्यना मठ, बोधगया में “चेतना का विज्ञान एवं आंतरिक शांति” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें कई विद्वान और आध्यात्मिक विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। 2570वीं बुद्ध जयंती का यह आयोजन बोधगया को एक बार फिर विश्व शांति और बौद्ध धर्म के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करता है। महाबोधि मंदिर में गूंजते धम्म संदेश और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता ने इस पर्व को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बना दिया है।

अष्टांग मार्ग

  • अष्टांग मार्ग बौद्ध धर्म का एक बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे भगवान बुद्ध ने दुखों से मुक्ति और शांत जीवन का रास्ता बताया है। अष्टांग मार्ग एक ऐसा “जीवन जीने का सही तरीका” है जिसमें सोच, बोल, काम और ध्यान सब कुछ सही और संतुलित रखा जाता है । इसे “मध्यम मार्ग” भी कहा जाता है, यानी न बहुत ज्यादा ऐश-आराम, न बहुत कठोर तपस्या बल्कि संतुलन वाला जीवन।
  • सम्यक दृष्टि – सही समझ रखना
  • सम्यक संकल्प – अच्छे और शुद्ध विचार रखना
  • सम्यक वाक् – सच और सही बोलना
  • सम्यक कर्म – अच्छे और नैतिक काम करना
  • सम्यक आजीविका – ईमानदारी से कमाई करना
  • सम्यक प्रयास – अच्छे कामों के लिए मेहनत करना
  • सम्यक स्मृति – हर समय जागरूक रहना
  • सम्यक समाधि – ध्यान लगाकर मन को शांत करना

बौद्ध विपश्यना 

बौद्ध विपश्यना बौद्ध धर्म की एक प्राचीन ध्यान पद्धति है, जिसका उद्देश्य मन को शांत करना और स्वयं को गहराई से समझना होता है। विपश्यना एक ऐसी ध्यान विधि है जिसमें व्यक्ति अपने मन, सांस और शरीर की गतिविधियों को बिना प्रतिक्रिया दिए सिर्फ “देखता और समझता” है।

विपश्यना का अर्थ

विपश्यना को भगवान बुद्ध ने आत्म-ज्ञान का मार्ग बताया है। यह बौद्ध धर्म के अष्टांग मार्ग का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि से जुड़ा हुआ। विपश्यना सिर्फ ध्यान नहीं, बल्कि एक आत्म-प्रशिक्षण है जिसमें इंसान अपने मन को समझकर शांत और संतुलित जीवन की ओर बढ़ता है
विपश्यना में व्यक्ति शांत जगह पर बैठता है अपनी सांस  पर ध्यान देता है शरीर में होने वाली संवेदनाओं को महसूस करता है किसी भी विचार या भावना को रोकता नहीं, बस “देखता” रहता है ,सबसे महत्वपूर्ण नियम ना प्रतिक्रिया देना, ना भागना—सिर्फ जागरूक रहना

विपश्यना के लाभ 

 इस विधि को सही तरीके से किया जाय तो यह हमरे मन को शांत,  तनाव और चिंता कम करना खुद के व्यवहार और विचारों को समझना राग और द्वेष को कम करना मानसिक शुद्धता और संतुलन देता है  विपश्यना को भगवान बुद्ध ने आत्म-ज्ञान का मार्ग बताया है। यह बौद्ध धर्म के अष्टांग मार्ग का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि से जुड़ा हुआ। विपश्यना सिर्फ ध्यान नहीं, बल्कि एक आत्म-प्रशिक्षण है जिसमें इंसान अपने मन को समझकर शांत और संतुलित जीवन की ओर बढ़ता है।
📱 हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
सरकारी सूचना राजनीति अतिथि
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
देश विदेश मनोरंजन/फैशन शिक्षा/करियर सेहत खेल कारोबार पर्यटन/यात्रा धर्म /ज्योतिष 🌙 डार्क/लाइट मोड ✍️ डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
🎬
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

⚠️
सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
🔔
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें