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भड़की हिंसा : जंगल बचाने पहुँचे कर्मचारी पर हमला, विस्थापन की आग में भड़का घरघोड़ा

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा रेंज में वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर तनाव हिंसक हो गया। चिमटापानी क्षेत्र में गश्त के दौरान वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को पोकलेन मशीन से जंगल की जमीन समतल करते हुए रोका, जिस पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि ग्रामीणों ने हथियारों और डंडों से वनकर्मियों पर हमला करने की कोशिश की और उन्हें मौके से भगा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि NTPC Limited द्वारा जमीन अधिग्रहण के बाद वे बेघर हो गए हैं, इसलिए मजबूरी में जंगल की जमीन पर बसने की कोशिश कर रहे हैं। घटना के बाद पुलिस ने कई नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला वन संरक्षण और विस्थापन के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करता है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
20 Apr 2026, 09:32 AM
रायगढ़

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला के घरघोड़ा रेंज में वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर तनाव हिंसक रूप लेता नजर आया। जंगल की जमीन बचाने पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया, जिससे इलाके में कानून-व्यवस्था और विस्थापन जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, चिमटापानी परिक्षेत्र में पदस्थ डिप्टी रेंजर विजय कुमार मिंज (54) अपने सहयोगी वन रक्षक सुभाष कुमार कर्ष के साथ नियमित गश्त पर निकले थे। यह गश्त बिच्छीनारा गांव के चोटीगुड़ा बीट के कक्ष क्रमांक 1348 (पीएफ) में की जा रही थी।

गश्त के दौरान उन्होंने देखा कि कुछ ग्रामीण पोकलेन मशीन का उपयोग कर जंगल की जमीन को समतल कर रहे थे और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचा रहे थे। वनकर्मियों ने जब इस कार्य की अनुमति के बारे में पूछा और अतिक्रमण रोकने की समझाइश दी, तो मामला अचानक बिगड़ गया।

ग्रामीणों का पक्ष

ग्रामीणों का कहना था कि उनकी जमीन पहले ही NTPC Limited द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी है। ऐसे में उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, इसलिए वे मजबूरी में जंगल की जमीन पर घर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बयान इस पूरे विवाद को केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि विस्थापन और पुनर्वास की समस्या से भी जोड़ता है।

हमला और धमकी

आरोप है कि दयाराम चौहान, रामप्रसाद सारथी, परखित उरांव, बलराम उरांव, प्रमोद उरांव और कुमार उरांव सहित कई ग्रामीण अचानक आक्रोशित हो गए। उन्होंने गाली-गलौज करते हुए टांगी और डंडों से लैस होकर वनकर्मियों पर हमला करने की कोशिश की। वन अधिकारियों को जान से मारने की धमकी दी गई और उन्हें मौके से खदेड़ दिया गया।

जान बचाकर भागे कर्मचारी

स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख डिप्टी रेंजर और वन रक्षक ने वहां से भागकर अपनी जान बचाई। बाद में उन्होंने कटंगडीह परिसर रक्षक सुरेंद्र सिंह सिदार को घटना की सूचना दी, लेकिन तब तक ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हुआ था।

पुलिस कार्रवाई

घटना के बाद वन विभाग ने उच्च अधिकारियों को सूचित करते हुए घरघोड़ा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने 6 नामजद आरोपियों समेत कई अन्य ग्रामीणों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक हमले की नहीं, बल्कि विकास परियोजनाओं, भूमि अधिग्रहण, और स्थानीय लोगों के पुनर्वास से जुड़े जटिल मुद्दों की ओर इशारा करती है। एक ओर वन विभाग पर्यावरण और कानून की रक्षा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अपने अस्तित्व और आश्रय के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।

अगर चाहें तो मैं इस खबर को और भी अलग-अलग एंगल (जैसे राजनीतिक, सामाजिक या कानूनी विश्लेषण) से विस्तार में समझा सकता हूँ।

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