मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने तथा बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने के लक्ष्य के तहत संचालित “मिशन उत्कर्ष 2.0” (सत्र 2026-27) के अंतर्गत कक्षा दसवीं के शिक्षकों का पांच दिवसीय विषयवार प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में यह प्रशिक्षण 16 से 21 अप्रैल तक रायपुर स्थित जे.आर. दानी शासकीय विद्यालय में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी एवं संस्कृत विषयों के बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
कमजोर विद्यार्थियों को मुख्यधारा में जोड़ने मार्गदर्शन
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुख एवं विद्यार्थियों के लिए सरल बनाना था। इसके अंतर्गत शिक्षकों को ब्लूप्रिंट आधारित शिक्षण पद्धति, प्रश्नपत्र निर्माण की आधुनिक तकनीक, कठिन विषयों को सरल एवं रोचक तरीके से पढ़ाने की रणनीतियाँ तथा कमजोर विद्यार्थियों को मुख्यधारा में जोड़ने के उपायों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।
रणनीतियों पर विशेष चर्चा
सामाजिक विज्ञान विषय के सत्रों में ब्लूप्रिंट के छह डोमेन की गहन समझ विकसित की गई। साथ ही कठिन अध्यायों की पहचान कर उन्हें सरल भाषा में पढ़ाने, प्रभावी प्रश्नपत्र तैयार करने तथा विद्यार्थियों को अवधारणात्मक रूप से समझाने की व्यावहारिक रणनीतियों पर विशेष चर्चा हुई।
हिंदी विषय में पाठ्यक्रम को सरल और समझने योग्य बनाने, व्याकरण एवं पाठों की प्रभावी प्रस्तुति, रटने की बजाय समझ आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने तथा परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने की रणनीतियों पर विशेष जोर दिया गया।
सरल तरीके से समझने पर कार्य
गणित विषय के प्रशिक्षण में ब्लूप्रिंट की विस्तृत समझ, विभिन्न स्तरों के प्रश्नों का अभ्यास, मॉडल प्रश्नपत्र निर्माण तथा त्रिकोणमिति जैसे जटिल अध्यायों को सरल उदाहरणों एवं गतिविधियों के माध्यम से समझाने की तकनीकों पर कार्य किया गया।
संस्कृत विषय में व्याकरण, श्लोक, गद्य-पाठन और लेखन कौशल को मजबूत करने के साथ-साथ गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
विस्तार से चर्चा
विज्ञान विषय में भौतिकी, रसायन एवं जीवविज्ञान की जटिल अवधारणाओं को सरल बनाने के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण, खेल, नाट्य प्रस्तुति, पीपीटी तथा ऑडियो-विजुअल माध्यमों का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही ब्लूम टैक्सोनॉमी के आधार पर प्रश्न निर्माण एवं कौशल विकास की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
अंग्रेजी विषय में विद्यार्थियों की रीडिंग, राइटिंग और ग्रामर स्किल को सुधारने के लिए सरल एवं प्रभावी शिक्षण विधियों पर जोर दिया गया। साथ ही प्रोजेक्ट आधारित एवं गतिविधि आधारित अधिगम को बढ़ावा देने की रणनीतियाँ भी साझा की गईं।
परीक्षा परिणामों में भी उल्लेखनीय वृद्धि
प्रशिक्षण के दौरान सभी विषयों के शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और नई शिक्षण तकनीकों को अपने कक्षाओं में लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से न केवल शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस पहल को जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और विद्यार्थियों के प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आगामी सत्र में इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए हायर सेकेंडरी स्तर के शिक्षकों का प्रशिक्षण 22 से 27 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

