खैरागढ़ नगर पालिका परिषद में 22 तारीख को दोपहर 1:00 बजे आयोजित सामान्य सभा की बैठक इस बार काफी गर्मागर्म माहौल में संपन्न हुई। बैठक के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के पार्षदों ने विभिन्न मुद्दों पर एक-दूसरे और प्रशासन से तीखे सवाल किए। कई बार स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सदन में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा और माहौल लगातार गरमाया रहा।
82 प्लेसमेंट कर्मचारियों को लेकर उठा बड़ा सवाल
बैठक में भाजपा पार्षद चंद्रशेखर यादव ने 82 प्लेसमेंट कर्मचारियों की नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले 52 कर्मचारी बताए जा रहे थे, फिर संख्या 82 तक कैसे पहुंची, यह स्पष्ट किया जाए। उन्होंने मांग की कि सभी कर्मचारियों की सूची, उनके कार्यस्थल और नियुक्ति विवरण सदन में प्रस्तुत किए जाएं।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि कहीं मृत व्यक्तियों के नाम पर भुगतान तो नहीं हो रहा है। इस पर जवाब देते हुए नगर पालिका के कर्मचारी टोडर सिंह ने समय मांगा और कहा कि संबंधित रजिस्टर फिलहाल उपलब्ध नहीं है, जिसे बाद में सदन में प्रस्तुत किया जाएगा।
उपस्थिति को लेकर भी उठा मुद्दा
बैठक में 20 में से 19 पार्षद उपस्थित रहे, जबकि पार्षद दिलीप लहरे अनुपस्थित रहे। बताया गया कि वे शहर में घूमते नजर आए और उन्होंने न तो बैठक में शामिल होने की सूचना दी और न ही अनुपस्थिति का कारण बताया, जिस पर अन्य सदस्यों ने असंतोष जताया।
ठेकेदारी और कार्यों में पक्षपात के आरोप
कांग्रेस पार्षद रज्जाक खान ने ठेकेदारी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ ठेकेदारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिससे वे अधिक कार्य ले लेते हैं लेकिन समय पर पूरा नहीं करते। इससे अन्य ठेकेदारों को काम नहीं मिल पा रहा है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
स्वच्छता व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
भाजपा पार्षद चंद्रशेखर यादव ने स्वच्छता श्रृंगार योजना और टेंडर प्रक्रिया में देरी को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हर साल समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होती, जिससे कार्य प्रभावित होता है। उन्होंने इस देरी के कारणों पर स्पष्ट जवाब मांगा।
वहीं, कांग्रेस विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन ने शहर के शौचालयों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था बेहद खराब है, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है।
कमीशनखोरी और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल
इसी विषय पर पार्षद चंद्रशेखर यादव ने आरोप लगाया कि कुछ कार्यों में प्लेसमेंट कर्मचारियों से काम कराया जा रहा है जबकि ठेकेदारों को भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बिना कार्य के भुगतान कैसे किया जा रहा है और चेक जारी करने की प्रक्रिया कौन नियंत्रित करता है।
नगर पालिका इंजीनियर की कार्यशैली पर सवाल
बैठक में नगर पालिका इंजीनियर की उपस्थिति और कार्यशैली पर भी सवाल उठे। आरोप लगाया गया कि पदस्थ होने के बावजूद वे नियमित रूप से कार्यालय नहीं आते। इस पर नाराजगी जताते हुए कहा गया कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो निंदा प्रस्ताव लाया जा सकता है।
सभापति से पूछे गए तीखे सवाल
कांग्रेस पार्षद पुरुषोत्तम वर्मा ने सभापति अजय जैन से उनके सदस्यों और जिम्मेदारियों को लेकर सवाल किया। हालांकि, सभापति की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर वर्मा ने नाराजगी जताई और कहा कि जिम्मेदार पद पर रहते हुए जानकारी का अभाव गंभीर विषय है।
नगर पालिका कार्यालय की स्थिति पर नाराजगी
सांसद प्रतिनिधि राकेश गुप्ता ने भी नगर पालिका कार्यालय की खराब स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कार्यालय के शौचालय और अन्य सुविधाएं बदहाल हैं, जिससे कार्यप्रणाली की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
59 करोड़ की जल आवर्धन योजना पर सवाल
मनराखन देवांगन ने 59 करोड़ रुपये की जल आवर्धन योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन पानी की आपूर्ति अब तक संतोषजनक नहीं है। उन्होंने एनीकेट निर्माण और जल भंडारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।
बजट पेश, लेकिन कई सवाल अनुत्तरित
बैठक के अंत में अध्यक्ष गिरजा चंद्राकर ने बजट प्रस्तुत किया, जिसमें कांजी हाउस, मुक्तिधाम उन्नयन और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाएं शामिल थीं। हालांकि, कई पार्षदों ने इन योजनाओं की लागत और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।
सीएमओ की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा
बैठक में सीएमओ से जब विभिन्न विषयों पर जवाब मांगा गया, तो उन्होंने स्वयं को नया पदस्थ बताते हुए कई सवालों पर स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया, जिससे असंतोष और बढ़ गया।
कुल मिलाकर बैठक में बढ़ा असंतोष
पूरी बैठक के दौरान पारदर्शिता, विकास कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। हालांकि, कई मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से सदन में असंतोष का माहौल बना रहा और बैठक समाप्त होते-होते कई प्रश्न अनसुलझे ही रह गए।

