महासमुंद जिले के शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के निर्देशों के बावजूद पिथौरा विकासखंड के बिजेमाल क्षेत्र में एक निजी स्कूल के संचालन को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। मामला “ए.के. स्मार्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल” से जुड़ा है, जिसे जिला कलेक्टर विनय लंगेह द्वारा बिना मान्यता प्राप्त होने के कारण तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए गए थे। इसके बावजूद स्कूल के संचालन और प्रचार-प्रसार को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल को कलेक्टर विनय लंगेह ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा था कि बिजेमाल स्थित इस विद्यालय को तुरंत बंद किया जाए और वहां पढ़ रहे छात्रों को नजदीकी मान्यता प्राप्त स्कूलों में स्थानांतरित किया जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
लेकिन स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, स्कूल संचालक कुशल पटेल द्वारा इस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि स्कूल को बंद करने के बजाय नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एडमिशन का प्रचार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप स्टेटस के माध्यम से किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर एडमिशन के दावे और लुभावने ऑफर
वायरल हो रहे पोस्टरों में अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह के वादे किए जा रहे हैं। इनमें कहा गया है कि—
- एक ही परिवार के तीन बच्चों में सबसे छोटे बच्चे की फीस माफ की जाएगी
- कम शुल्क में हॉस्टल और वाहन सुविधा उपलब्ध होगी
- खेल मैदान, योगा, डांस और ड्राइंग जैसी अतिरिक्त गतिविधियां कराई जाएंगी
- अनुभवी शिक्षकों और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था का दावा किया जा रहा है
इसके साथ ही संपर्क के लिए मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक रूप से साझा किए जाने की बात सामने आई है, जिससे अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बन रही है।

भवन और सुविधाओं को लेकर भी सवाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिस भवन में स्कूल संचालित बताया जा रहा है, वहां निर्माण कार्य भी अधूरा है। छत की ढलाई तक पूरी न होने और सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था न होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि संस्थान में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति भी पर्याप्त नहीं है।
निरीक्षण और प्रशासनिक कार्रवाई
मामले की शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग की टीम द्वारा निरीक्षण किया गया था। संकुल समन्वयक तुलाराम राणा जब मौके पर पहुंचे, तो वहां कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं मिला। इसके बाद टीम ने पंचनामा तैयार कर कलेक्टर के आदेश की प्रति स्कूल परिसर में चस्पा कर दी।
हालांकि इसके बावजूद, स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन माध्यमों पर स्कूल की गतिविधियां और प्रवेश संबंधी प्रचार जारी है, जिससे भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी को लिखित शिकायत भेजते हुए आरोप लगाया है कि विभागीय लापरवाही और कथित मिलीभगत के कारण यह संस्थान लंबे समय तक बिना मान्यता के संचालित होता रहा।
उन्होंने यह भी दावा किया है कि इस तरह के मामलों से क्षेत्र में अन्य लोगों को भी बिना मान्यता वाले स्कूल खोलने की प्रेरणा मिल सकती है, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
अभिभावकों की चिंता और प्रशासन की चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर जिला प्रशासन स्कूल को बंद करने के आदेश दे चुका है, वहीं दूसरी ओर प्रचार-प्रसार और प्रवेश के दावों ने स्थिति को और उलझा दिया है।
यदि समय रहते इस मामले में स्पष्ट और सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ सकता है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि प्रशासनिक आदेशों के बावजूद ऐसी गतिविधियां कैसे जारी हैं।

