मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी बांध में गुरुवार शाम प्रकृति के प्रकोप और प्रशासनिक लापरवाही के मेल ने एक भीषण त्रासदी को जन्म दे दिया। तेज आंधी और उफनती लहरों के बीच एक पर्यटक क्रूज जलमग्न हो गया। इस हृदयविदारक घटना में अब तक 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य अब भी लापता हैं। यह हादसा न केवल मौसम की मार है, बल्कि पर्यटन सुरक्षा के दावों पर एक गहरा दाग भी है।
चीख-पुकार में बदली सैर-सपाटे की शाम
गुरुवार की शाम करीब 30 पर्यटक क्रूज पर सवार होकर नर्मदा के बैकवाटर का आनंद ले रहे थे। अचानक मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ तूफान खड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी में उठी ऊंची लहरों ने क्रूज का संतुलन बिगाड़ दिया। जब तक चालक दल कुछ संभल पाता, क्रूज अनियंत्रित होकर पानी में समाने लगा। चीख-पुकार के बीच कई लोग गहरे पानी में समा गए, तो कुछ क्रूज के ढांचे के भीतर ही फंस गए।
जिंदा रहने की 'जैकेट' बनी मौत का कारण
हादसे के बाद जो सबसे भयावह सच सामने आया, वह है सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी। शुरुआती जांच में पता चला है कि क्रूज पर सवार सभी यात्रियों के पास लाइफ जैकेट नहीं थी।
देरी से मिली मदद: कई यात्रियों ने बताया कि जब नाव डूबने लगी, तब जाकर लाइफ जैकेट बांटने की कोशिश की गई, जो उस आपातकालीन स्थिति में बेअसर साबित हुई।
नियमों की धज्जियां: जिन चंद लोगों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, वे तैरकर बाहर आने में सफल रहे। वहीं, बिना जैकेट वाले पर्यटक संघर्ष करते हुए लहरों के बीच ओझल हो गए।
प्रबंधन की चूक: सवाल यह उठता है कि क्या क्रूज रवाना करने से पहले यात्रियों को सुरक्षा उपकरण पहनाना अनिवार्य नहीं था?
हादसे के बाद उठते सुलगते सवाल
यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश के जल पर्यटन केंद्रों पर सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हों। हर बड़े हादसे के बाद जांच कमेटियां बैठती हैं और सुधार के वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी रहती है। बरगी बांध जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर क्या आपातकालीन बचाव दल (Rescue Team) की तैनाती पर्याप्त थी? क्या मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद क्रूज को पानी में जाने की अनुमति दी गई थी?
जांच के आदेश और भविष्य की चुनौती
राज्य सरकार ने इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सवाल वही है—क्या खोई हुई जानें लौट पाएंगी?
वर्तमान में एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। यह हादसा एक चेतावनी है कि अगर अब भी बुनियादी सुरक्षा नियमों और 'लाइफ जैकेट प्रोटोकॉल' को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो पर्यटन के ये केंद्र 'मौत के घाट' बनते रहेंगे।
