निर्माण कार्यों पर सियासी टकराव : अध्यक्ष ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, पार्षद के प्रमाण से उलझी पूरी कहानी
खैरागढ़ नगर पालिका में नाली और सीसी रोड निर्माण को लेकर विवाद गहराया है। अध्यक्ष ने “पहले भुगतान, बाद में काम” का आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार की शिकायत की है, जबकि वार्ड पार्षद ने लिखित प्रमाण देकर बताया कि काम पहले ही पूरा हो चुका था। विरोधाभासी दावों के बीच अब प्रशासन जांच कर रहा है कि सच्चाई दस्तावेजों में है या जमीनी हकीकत में।
कीर्तिमान ब्यूरो
26 Apr 2026, 10:52 AM
📍 खैरागढ़
नगर पालिका परिषद खैरागढ़ में नाली और सीसी रोड निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब महज तकनीकी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सियासी असहजता और अंदरूनी तालमेल की कमी की कहानी बनता जा रहा है। एक ही काम को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आने से पूरा मामला उलझ गया है और अब जांच रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं।
अध्यक्ष का आरोप: पहले भुगतान, बाद में काम
नगर पालिका अध्यक्ष गिरिजा चंद्राकर ने वार्ड क्रमांक 6 में हुए दो निर्माण कार्यों नाली और सीसी रोड निर्माण में गंभीर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 3 मार्च 2026 को इन कार्यों का भुगतान कर दिया गया, जबकि दस्तावेजों में काम की शुरुआत 12 मार्च से दिखाई गई है। नियमों के अनुसार भुगतान कार्य की प्रगति के आधार पर होना चाहिए, ऐसे में “पहले भुगतान, बाद में काम” का मामला सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की आशंका पैदा करता है।
पार्षद का दावा: काम पहले ही हो चुका था
इस मामले ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब वार्ड की पार्षद मोनिका रजक का लिखित प्रमाण सामने आया। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि दोनों निर्माण कार्य दिसंबर 2025 में ही पूरे हो चुके थे और 15 जनवरी तक उनका समापन भी हो गया था। पार्षद ने न केवल काम की गुणवत्ता और स्थान की पुष्टि की, बल्कि यह भी लिखा कि किसी भी शिकायत की जिम्मेदारी उनकी होगी। इसी आधार पर उन्होंने भुगतान की अनुशंसा भी की थी।
यहीं से उलझा पूरा मामला
अब सवाल यह नहीं रह गया है कि काम हुआ या नहीं, बल्कि असली सवाल यह बन गया है कि—
कागजों में दर्ज तारीखें सही हैं या शिकायत की नींव ही कमजोर है?
एक तरफ अध्यक्ष दस्तावेजों के आधार पर अनियमितता का आरोप लगा रही हैं, तो दूसरी तरफ पार्षद और स्थानीय स्तर के प्रमाण काम पूरा होने की पुष्टि कर रहे हैं।
समन्वय की कमी या सियासी रणनीति?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या शिकायत दर्ज करने से पहले अध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी की पार्षद से चर्चा नहीं की? अगर पार्षद पहले ही काम पूरा होने का प्रमाण दे चुकी थीं, तो बिना समन्वय शिकायत करना अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं—इसे अंदरूनी खींचतान से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
प्रशासन हरकत में, जांच जारी
शिकायत सामने आते ही प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजा। निरीक्षण के बाद अब जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि सच्चाई आखिर किसके पक्ष में है—
फाइलों में दर्ज तारीखों के साथ या जमीन पर दिख रहे काम के साथ।
एक मिसाल बनता जा रहा मामला
खैरागढ़ का यह मामला अब इस बात का उदाहरण बन गया है कि एक ही काम को लेकर दो अलग-अलग दावे किस तरह पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला सकते हैं। अब शहर की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह मामला वास्तव में भ्रष्टाचार का है या फिर समन्वय की कमी से उपजा विवाद।