दुर्ग जिले में सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए यातायात पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए लगातार व्यापक अभियान चला रखा है। खासकर बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पुलिस विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक बिना हेलमेट वाहन चलाने के 23,088 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। इन मामलों से लगभग 1 करोड़ 15 लाख 44 हजार रुपये का समन शुल्क (जुर्माना) वसूला गया है। अधिकारियों का कहना है कि लगातार चालानी कार्रवाई और चेकिंग से लोगों की आदतों में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
लाखों की वसूली
पिछले वर्षों के आंकड़े भी इस अभियान की बढ़ती रफ्तार और सख्ती को दर्शाते हैं। वर्ष 2023 में 1,653 मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब 8 लाख 26 हजार 500 रुपये का जुर्माना वसूला गया था। इसके बाद 2024 में अभियान और तेज हुआ, जिसमें 3,961 मामलों में कार्रवाई कर लगभग 19 लाख 80 हजार 500 रुपये का समन शुल्क लिया गया। वहीं 2025 में 2,328 मामलों में कार्रवाई करते हुए 11 लाख 64 हजार रुपये की वसूली की गई।
हेलमेट पहने होते, तो कई जिंदगियां बचाई
सिर्फ चालान ही नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2025 में बिना हेलमेट पहनने की वजह से हुई सड़क दुर्घटनाओं में 230 लोगों की मौत दर्ज की गई थी। वहीं 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 26 लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि ये लोग हेलमेट पहने होते, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
अभियान का असर
यातायात पुलिस का कहना है कि इस अभियान का सकारात्मक असर भी दिखने लगा है। अब पहले की तुलना में अधिक लोग हेलमेट पहनकर वाहन चला रहे हैं, जिससे सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी जारी है, जिसे देखते हुए अभियान और सख्ती से चलाया जा रहा है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में भी यह कार्रवाई जारी रहेगी। इसके लिए शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में नियमित चेकिंग प्वाइंट, पेट्रोलिंग टीम और संयुक्त अभियान लगातार सक्रिय रहेंगे, ताकि सड़क हादसों और अनावश्यक मौतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
पिछले वर्षों का रिकॉर्ड:
- 2023: 1,653 मामले, ~8.26 लाख रुपये जुर्माना
- 2024: 3,961 मामले, ~19.8 लाख रुपये
- 2025: 2,328 मामले, ~11.64 लाख रुपये

