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छत्तीसगढ़

माओवादी संगठनों पर सख्ती : CPI (माओवादी) सहित 6 फ्रंटल संगठनों पर प्रतिबंध एक साल और बढ़ा

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाते हुए CPI (माओवादी) और उससे जुड़े छह फ्रंटल संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंध को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है, जो 12 अप्रैल 2026 से लागू होगा। सरकार का कहना है कि ये संगठन कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं तथा शहरी क्षेत्रों तक अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें आदिवासी, महिला और किसान संगठनों सहित “जनताना सरकार” जैसे ढांचे भी शामिल हैं, जिन्हें समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था माना जाता है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
20 Apr 2026, 10:18 AM
📍 रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण को और सख्त करते हुए एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया है। इसके तहत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) और उससे जुड़े छह फ्रंटल (अग्र) संगठनों पर लगाया गया प्रतिबंध एक बार फिर बढ़ा दिया गया है। यह प्रतिबंध अब एक और वर्ष तक प्रभावी रहेगा।

राज्य सरकार का कहना है कि इन संगठनों की गतिविधियाँ न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही हैं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं और विकास कार्यों के संचालन में भी बाधा उत्पन्न कर रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। नई अधिसूचना 12 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी और अगले एक वर्ष तक लागू रहेगी।

शहरी इलाकों में भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश 

यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, 2005 (क्रमांक 14 सन् 2006) की धारा-3 की उपधारा (1) के तहत प्राप्त शक्तियों के आधार पर की गई है। सरकार का दावा है कि इन संगठनों की गतिविधियाँ राज्य के अंदरूनी और दूरस्थ क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे धीरे-धीरे शहरी इलाकों में भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

महिला और आदिवासी वर्ग में नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश का आरोप

प्रतिबंधित संगठनों में शामिल “क्रांतिकारी आदिवासी महिला संघ” को माओवादी विचारधारा के विस्तार से जुड़ा एक प्रमुख फ्रंटल संगठन माना जाता है। आरोप है कि यह संगठन विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं को संगठित करने और उन्हें माओवादी विचारधारा से जोड़ने का काम करता है। साथ ही, यह संगठन महिला कैडरों की भर्ती में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।

सरकारी आकलन के अनुसार, यह नेटवर्क दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों से आगे बढ़कर शहरी क्षेत्रों में भी अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी है।

‘जनताना सरकार’ पर भी सख्ती

इसी तरह “आरपीसी” या “जनताना सरकार” को माओवादी संगठन की समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था माना जाता है। आरोप है कि यह ढांचा उन इलाकों में सक्रिय रहता है जहां माओवादी प्रभाव अधिक है और वहां खुद की व्यवस्था चलाने की कोशिश करता है।

इन गतिविधियों के तहत कथित रूप से ‘स्थानीय अदालतें’, ‘कर वसूली’ और अन्य प्रशासनिक फैसले जैसे कार्य किए जाते हैं, जिन्हें राज्य सरकार अपनी वैधानिक सत्ता को सीधी चुनौती मानती है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि यह संरचना सरकारी विकास योजनाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के विरोध में काम करती है।

प्रतिबंधित किए गए प्रमुख संगठन

सरकार ने जिन संगठनों को विधि-विरुद्ध घोषित करते हुए प्रतिबंध जारी रखा है, उनमें शामिल हैं—

  • दण्डकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ
  • क्रांतिकारी आदिवासी महिला संघ
  • क्रांतिकारी आदिवासी बालक संघ
  • क्रांतिकारी किसान कमेटी
  • महिला मुक्ति मंच
  • आरपीसी (जनताना सरकार)

इन सभी को माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ या उसके फ्रंटल संगठन माना गया है।

सरकार का तर्क

राज्य सरकार के अनुसार इन संगठनों की गतिविधियाँ सार्वजनिक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। साथ ही, ये संगठन प्रशासनिक कामकाज और विकास परियोजनाओं में बाधा डालते हैं। इसी वजह से इनके खिलाफ प्रतिबंध को आगे बढ़ाना आवश्यक समझा गया।

इस फैसले के बाद राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की संभावना है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास कार्यों को गति दी जा सके।

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