प्रदेश के सरगुजा जिले से एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ सीतापुर थाना क्षेत्र में दरिंदों ने दो मासूम आदिवासी बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया। 23 अप्रैल 2026 की रात हुई इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार युवकों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जांच तेज कर दी है।
शादी समारोह से लौटते समय रास्ते में घेरा
पुलिस के अनुसार, सातवीं और आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली चार सहेलियाँ गांव में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने गई थीं। देर रात जब वे वापस घर लौट रही थीं, तभी बाइक सवार युवकों के एक समूह ने उनका रास्ता रोक लिया। डरी-सहमी बच्चियों को आरोपियों ने जबरन अपनी मोटर साइकिलों पर बैठाने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि आरोपी दो लड़कियों को अलग-अलग दिशाओं में लेकर भाग गए। इनमें से एक बच्ची को सुनसान नदी किनारे ले जाया गया, जबकि दूसरी को एक जर्जर खंडहरनुमा मकान में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया।
दो बच्चियों ने सूझबूझ से बचाई जान
इस खौफनाक रात में दो अन्य बच्चियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। तीसरी लड़की को भी आरोपी बाइक पर बैठाकर ले जा रहे थे, लेकिन वह चलती गाड़ी से कूद गई, जिससे उसे गंभीर चोटें भी आई हैं। वहीं, चौथी लड़की आरोपियों के चंगुल में नहीं फंसी और पूरी रात खेतों और झाड़ियों में छिपकर अपनी जान बचाई। सुबह होने पर उसने एक ग्रामीण के घर में शरण ली।
परिजनों के पूछने पर फूटा दर्द
लोक-लाज और डर के मारे बच्चियों ने शुरुआत में घर पर कुछ नहीं बताया। लेकिन जब अगले दिन उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और वे गुमसुम रहने लगीं, तब परिजनों को संदेह हुआ। कड़ाई से पूछने पर बच्चियों ने अपने साथ हुई दरिंदगी की दास्तां सुनाई, जिसे सुनकर पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। इसके तुरंत बाद परिजन थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
सरगुजा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को चिन्हित कर लिया है, जिनमें से दो नाबालिग बताए जा रहे हैं। आरोपी पीड़ित लड़कियों के पड़ोसी गांव के ही रहने वाले हैं।
पुलिस का आधिकारिक बयान: "हमने चार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें रवाना कर दी गई हैं और जल्द ही वे सलाखों के पीछे होंगे।"
फिलहाल, क्षेत्र में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और आदिवासी समाज ने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है। राज्य सरकार और प्रशासन ने भी मामले को संज्ञान में लेते हुए पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद और न्याय का आश्वासन दिया है।
