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मामला ग्राम पंचयत नर्मदापुर का
मामला ग्राम पंचयत नर्मदापुर का
छत्तीसगढ़

मैनपाट के नर्मदापुर पंचायत में लाखों की हेराफेरी, सरपंच ने सचिव पर लगाए फर्जी हस्ताक्षर और ओटीपी दुरुपयोग के आरोप

मैनपाट क्षेत्र के नर्मदापुर ग्राम पंचायत में सरपंच ललिता बाई ने पंचायत सचिव पर फर्जी हस्ताक्षर कर 5 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी और ओटीपी के जरिए ऑनलाइन भुगतान में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। मामले में शिकायत के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने भी फर्जी बिल, चेक बाउंस और घटिया निर्माण कार्यों की शिकायत की है, जिससे लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। अब जिला स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 19 Apr 2026, 04:04 PM · अपडेट: 03 Nov 2026, 09:17 PM
सरगुजा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में स्थित मैनपाट क्षेत्र, जिसे “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहा जाता है, के ग्राम पंचायत नर्मदापुर में कथित वित्तीय अनियमितताओं का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां की महिला सरपंच ललिता बाई ने पंचायत सचिव सिकंदर प्रजापति पर फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों रुपये की हेराफेरी करने का आरोप लगाया है।

सरपंच के अनुसार, सचिव ने उनके हस्ताक्षर की नकल कर पंचायत खाते से 5 लाख रुपये से अधिक की राशि का आहरण कर लिया। इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भी दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जांच और कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है, जिससे पंचायत के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

अवैध तरीकों से संपत्ति अर्जित

ललिता बाई ने यह भी आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है। उनके मुताबिक, जब उनके पति पहले सरपंच थे, तब भी इसी सचिव द्वारा अनियमितताएं की गई थीं। उनका दावा है कि अवैध तरीकों से बड़ी संपत्ति अर्जित की गई है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो उल्टा उन्हें ही फर्जी मामलों में फंसाया जा सकता है।

मामले में एक और गंभीर पहलू यह सामने आया है कि पंचायत के ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सचिव द्वारा सरपंच से ओटीपी लेकर मनमाने ढंग से भुगतान किए जाने के आरोप भी लगे हैं। यह डिजिटल प्रक्रिया के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

भुगतान का चेक बाउंस 

ग्राम पंचायत नर्मदापुर के निवासी कुंज बिहारी गुप्ता ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि उन्होंने तटबंध निर्माण कार्य के लिए सामग्री की आपूर्ति की थी, लेकिन भुगतान के रूप में मिला चेक बाउंस हो गया। इसी तरह अन्य लोगों के साथ भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। आरोप है कि पंचायत खाते में फर्जी बिल लगाकर राशि निकाली गई, जबकि वास्तविक भुगतान नहीं किया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले करीब 10 वर्षों में पंचायत के अंतर्गत हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी संदिग्ध रही है। कई निर्माण कार्य कुछ ही समय में जर्जर हो गए, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरा गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पिछले वर्षों में हुए सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खर्च की गई राशि का वास्तविक उपयोग क्या हुआ और लोगों को योजनाओं का लाभ मिला या नहीं।

करेगा गंभीर प्रश्न खड़े 

गौरतलब है कि यह क्षेत्र जनजाति बहुल है, जहां विकास योजनाओं का सही क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला होगा, बल्कि ग्रामीण विकास और जनहित से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़े करेगा।

इस पूरे मामले को लेकर जिला पंचायत स्तर तक शिकायत पहुंच चुकी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से जांच करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

अब सवाल है—आगे क्या होना चाहिए?

ऐसे मामलों में सामान्यतः ये कदम जरूरी होते हैं:

  • स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच (जिला पंचायत या उच्च स्तर की एजेंसी द्वारा)
  • पंचायत खातों का फॉरेंसिक ऑडिट
  • संबंधित अधिकारी/सचिव का तत्काल स्थानांतरण या निलंबन (जांच के दौरान)
  • पिछले वर्षों के कार्यों का भौतिक सत्यापन (फील्ड वेरिफिकेशन)
  • यदि आरोप सही पाए जाएं तो एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई
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