भारतीय रेलवे ने स्लीपर कोच में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी घोषणा की है। अब ट्रेनों के स्लीपर क्लास (Sleeper Coach) में यात्रा करने वाले लोगों को भी एसी (AC) कोच की तर्ज पर साफ-सुथरे और सैनिटाइज्ड बेडरोल की सुविधा दी जाएगी। यह पहल यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने और उन्हें भारी-भरकम सामान के बोझ से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।
भोपाल से होगी इस खास सुविधा की शुरुआत
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से यात्रा शुरू करने वाले यात्रियों के लिए यह 'गुड न्यूज' 15 मई से लागू होने जा रही है। रेलवे प्रशासन ने शुरुआती चरण में इस सेवा को भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस में शुरू करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में, इसी तरह की सुविधा भोपाल-लखनऊ गरीब रथ एक्सप्रेस में पहले से ही सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है।
कितना देना होगा शुल्क?
यह सेवा 'ऑन-डिमांड' और 'पेमेंट' के आधार पर उपलब्ध होगी। यानी, जो यात्री इस सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए एक निर्धारित शुल्क देना होगा:
बेडशीट (चादर): ₹40
तकिया और कवर: ₹30
फुल किट (दोनों): ₹70
विशेष ध्यान दें: एसी कोच में बेडरोल का शुल्क टिकट के किराए में ही शामिल होता है, लेकिन स्लीपर कोच में यात्रियों को अपनी जरूरत के अनुसार अलग से भुगतान करना होगा।
यात्रियों को मिलेगी भारी सामान से राहत
अक्सर स्लीपर कोच में रात के सफर के दौरान यात्रियों को घर से भारी कंबल, चादर और तकिया लेकर चलना पड़ता था। इससे न केवल बैग का वजन बढ़ता था, बल्कि ट्रेन की भीड़ में सामान संभालना भी मुश्किल होता था। अब रेलवे की इस नई व्यवस्था से यात्रियों को पूरी तरह से कीटाणुरहित (Sanitized) और रेडी-टू-यूज बेडरोल उनकी सीट पर ही मिल जाएंगे।
कैसे करें बेडरोल की बुकिंग?
रेलवे ने बुकिंग की प्रक्रिया को बेहद सरल और डिजिटल बनाया है। यात्री निम्नलिखित तरीकों से इस सेवा का लाभ ले सकते हैं:
टिकट बुकिंग के समय: IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से टिकट बुक करते समय आप 'Add Bedding Kit' का विकल्प चुन सकते हैं।
ट्रेन के भीतर: कुछ चुनिंदा ट्रेनों में यात्री अपनी सीट पर मौजूद स्टाफ को सीधे भुगतान करके भी बेडरोल प्राप्त कर सकेंगे।
स्टेशन काउंटर: प्रमुख स्टेशनों पर स्थापित बेडरोल काउंटरों से भी इसे यात्रा शुरू करने से पहले खरीदा जा सकता है।
रेलवे का यह कदम न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि आधुनिक यात्रा के मानकों को स्लीपर क्लास तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।
