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गुरु प्रदोष व्रत
गुरु प्रदोष व्रत
धर्म /ज्योतिष

14 मई 2026 : गुरु प्रदोष व्रत को विशेषज्ञ बता रहे मनोकामनाएं पूरी करने का सुनहरा अवसर

गुरु प्रदोष व्रत सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और इच्छाओं के पूर्ण होने का प्रतीक है। 14 मई 2026 का दिन आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है बस श्रद्धा और सही समय का ध्यान रखें।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
06 May 2026, 11:56 AM
📍 नुआपाड़ा ओडिशा

मई 2026 में पड़ने वाला गुरु प्रदोष व्रत श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। इस बार यह व्रत सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मनोकामनाओं की पूर्ति का विशेष योग लेकर आ रहा है। ऐसे में यह दिन आस्था रखने वालों के लिए किसी अवसर से कम नहीं अगर आप चूक गए, तो साल भर इंतजार करना पड़ सकता है। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. कुबेर महाराज हिंदू पंचांग के अनुसार बताते हैं कि जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन आता है, तो उसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और विशेष रूप से सुख, समृद्धि, और इच्छाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है।

कब है गुरु प्रदोष व्रतज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस बार 14 मई 2026, गुरुवार को पड़ रही है। जानकारों के मुताबिक त्रयोदशी तिथि 14 मई की सुबह 11:20 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 15 मई, सुबह 8:31 बजे समाप्त होने वाली है। बताया जा रहा है कि प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए व्रत 14 मई (गुरुवार) को ही रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त : इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष शुभ समय प्राप्त हो रहा है, शाम 7:04 बजे से रात 9:09 बजे तक यानि कुल अवधि लगभग 2 घंटे 5 मिनट का रहेगा। यही वह प्रदोष काल होता है, जब शिव पूजन का सबसे अधिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस समय की गई पूजा कई गुना फल देती है।

क्यों है यह व्रत खास : पं. कुबेर महाराज नुआपाड़ा वाले बताते हैं कि इस बार गुरु प्रदोष व्रत पर मनोकामना पूर्ति का विशेष योग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और शिव पूजन करने से रुके हुए काम बनते हैंआर्थिक स्थिति में सुधार होता हैविवाह और संतान संबंधी इच्छाएं पूरी होती हैंमानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती हैअगर किसी कारणवश शाम को पूजा न कर पाएं, तो दिन में भी श्रद्धा से पूजन किया जा सकता है, लेकिन प्रदोष काल का महत्व सबसे अधिक होता है(टीप: यह कीर्तिमान का दावा नहीं है, यह एक धार्मिक सूचना है, इसका पालन आस्था पर निर्भर करता है, बाध्यता नहीं।)

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