छत्तीसगढ़ के परिवहन विभाग में डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। ऑनलाइन सेवाएं होने के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश के RTO और DTO कार्यालय इस समय इंटरनेट संकट से जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि पूरा सिस्टम अब मोबाइल हॉटस्पॉट और निजी डेटा कनेक्शन के भरोसे चल रहा है। इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी Smart Link Solution Private Limited का अनुबंध समाप्त होने के बाद प्रदेशभर के आरटीओ कार्यालयों से हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा पूरी तरह बंद हो गई है। इसके बाद कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है और हजारों फाइलें लंबित पड़ी हैं।
सिस्टम बंद, कर्मचारी परेशान
सूत्रों के मुताबिक, अनुबंध खत्म होते ही कंपनी ने अपने सभी उपकरण—लीज्ड लाइन, राउटर, एंटीना और नेटवर्क केबल—कार्यालयों से हटा लिए। खासकर बिलासपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पूरा नेटवर्क सिस्टम ठप हो गया। अब स्थिति यह है कि कर्मचारी अपने निजी मोबाइल इंटरनेट से दफ्तर का काम चला रहे हैं। कई कर्मचारी रोजाना 4 से 5 जीबी तक अतिरिक्त डेटा रिचार्ज कर रहे हैं ताकि काम आगे बढ़ सके, लेकिन नेटवर्क की धीमी गति ने हालात और खराब कर दिए हैं।
सबसे ज्यादा असर इन सेवाओं पर
इंटरनेट ठप होने का सीधा असर आम जनता से जुड़ी सेवाओं पर पड़ा है—
ड्राइविंग लाइसेंस सेवाएं
- लर्निंग लाइसेंस
- स्थायी लाइसेंस
- डुप्लीकेट लाइसेंस
- रिन्यूअल प्रक्रिया
- स्लॉट बुकिंग
वाहन संबंधित काम
- नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन (2-3 दिन की देरी)
- RC नवीनीकरण
- स्वामित्व परिवर्तन
टैक्स और परमिट
- रोड टैक्स भुगतान
- फिटनेस सर्टिफिकेट
- नेशनल/स्टेट परमिट
अन्य सेवाएं
- फैंसी नंबर बुकिंग
- ऑनलाइन भुगतान
हजारों आवेदन अटके, बढ़ी भीड़
इंटरनेट सिस्टम फेल होने के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर काम लगभग रुक गया है। सारथी (Sarathi) और वाहन (Vahan) पोर्टल पर लगातार एरर आने से आवेदन प्रोसेस नहीं हो पा रहे हैं।
इस वजह से—
- हजारों आवेदन लंबित
- RTO कार्यालयों में भीड़ बढ़ी
- कामकाज 2-3 दिन पीछे चल रहा है
- लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं
विभाग का निर्देश: “जुगाड़ से चलाओ सिस्टम”
परिवहन विभाग ने सभी RTO और DTO अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था करें और कामकाज प्रभावित न होने दें। अपर परिवहन आयुक्त ने 7 अप्रैल को जारी पत्र में साफ कहा था कि इंटरनेट बंद होने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाकर सेवाएं चालू रखी जाएं। लेकिन वास्तविकता यह है कि न तो पर्याप्त बजट है और न ही मजबूत तकनीकी बैकअप, जिसके कारण व्यवस्था पूरी तरह जुगाड़ पर चल रही है।
विभाग का दावा: जल्द सुधरेगी स्थिति
परिवहन विभाग का कहना है कि यह समस्या अस्थायी है। विभाग के अनुसार बजट स्वीकृति में देरी के कारण यह स्थिति बनी। अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर (रायपुर) ने बताया—
“बजट स्वीकृत हो चुका है और नए इंटरनेट सेवा प्रदाता की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही सभी RTO कार्यालयों में हाई-स्पीड इंटरनेट बहाल कर दिया जाएगा।”
डिजिटल सिस्टम इतना कमजोर
छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग की यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है—
- क्या पूरे सिस्टम की निर्भरता सिर्फ एक कंपनी पर थी?
- क्या बैकअप नेटवर्क की कोई व्यवस्था नहीं थी?
- डिजिटल इंडिया के दौर में भी इतना बड़ा तकनीकी फेलियर क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि एकल सेवा प्रदाता पर निर्भरता और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर इस संकट की मुख्य वजह है।
आम जनता परेशान, अफसर दबाव में
RTO कार्यालयों में रोजाना पहुंचने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और परमिट के लिए लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है। दूसरी तरफ अधिकारी और कर्मचारी भी दबाव में हैं क्योंकि वे सीमित संसाधनों में काम चला रहे हैं।
