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Women Reservation Bill : संसद में अटका महिला आरक्षण विधेयक, हेमा मालिनी और कंगना रनौत की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- महिलाओं के लिए यह बड़ा झटका

महिला आरक्षण विधेयक का पारित न हो पाना केवल एक विधायी असफलता नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं से जुड़ा सवाल है। Hema Malini और Kangana Ranaut जैसी हस्तियों की प्रतिक्रिया इस बात को रेखांकित करती है कि यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर कितना संवेदनशील और महत्वपूर्ण है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
19 Apr 2026, 02:27 AM
📍 नई दिल्ली

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित न हो पाने के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बहुप्रतीक्षित बिल के अटकने पर जहां सियासी दल आमने-सामने हैं, वहीं फिल्म जगत से राजनीति में आईं प्रमुख हस्तियों में हेमा मालिनी और कंगना रनौत ने भी खुलकर निराशा और आक्रोश जताया है। मथुरा से भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने महिला आरक्षण विधेयक के अटकने पर गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह “महिलाओं के लिए बेहद दुखद दिन” है।

हेमा मालिनी ने बताया कि उन्होंने संसद में मतदान से पहले इस विधेयक के महत्व पर अपनी बात रखी थी और उम्मीद जताई थी कि यह ऐतिहासिक कदम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई दिशा देगा। लेकिन बिल का पारित न हो पाना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी निराशाजनक रहा। उन्होंने कहा कि देशभर की महिलाएं लंबे समय से इस विधेयक का इंतजार कर रही थीं, ताकि उन्हें निर्णय लेने वाली संस्थाओं में बराबरी का अवसर मिल सके। इस घटनाक्रम से उन उम्मीदों को ठेस पहुंची है। साथ ही उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को सुनने की अपील भी की।

कंगना रनौत का तीखा हमला : वहीं, अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर और भी सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के विफल होने को “व्यक्तिगत क्षति” और “शर्मनाक घटना” बताया। मीडिया से बातचीत में कंगना ने कहा कि “आज इससे ज्यादा दुखद और पीड़ादायक कुछ नहीं हो सकता। यह केवल एक बिल का फेल होना नहीं, बल्कि महिलाओं की आकांक्षाओं की अनदेखी है।” उन्होंने विपक्ष, खासकर Indian National Congress पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने इस मुद्दे पर “सभी हदें पार कर दीं” और राजनीतिक हितों को महिलाओं के अधिकारों से ऊपर रखा। कंगना ने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम से देश की बेटियों का मनोबल प्रभावित हुआ है।

संसद में क्या हुआ जानिए यहां :  लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर लंबी बहस हुई। सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसके प्रावधानों, समय-सीमा और परिसीमन से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था। हालांकि, बिल के समर्थन में पर्याप्त मत पड़े, लेकिन यह आवश्यक संख्या तक नहीं पहुंच सका, जिसके कारण यह पारित नहीं हो पाया। इस दौरान सदन में कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जिसने पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक बना दिया।

महिला आरक्षण विधेयक क्यों अहम :  महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में, जहां महिलाओं की आबादी लगभग आधी है, वहां उनकी राजनीतिक भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक न सिर्फ प्रतिनिधित्व बढ़ाएगा, बल्कि नीति-निर्माण में महिलाओं के दृष्टिकोण को भी मजबूती देगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर अधिक संवेदनशील और समावेशी फैसले लिए जा सकेंगे।

राजनीतिक असर और आगे की राह : महिला आरक्षण विधेयक का अटकना आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। एक ओर जहां सत्ता पक्ष इसे पारित कराने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहा है, वहीं विपक्ष इसके स्वरूप और प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले चुनावों में भी प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बन सकता है।

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