छत्तीसगढ़ इस वक्त मौसम के दोहरे प्रहार से जूझ रहा है। प्रदेश के मैदानी इलाकों में जहां सूरज की तपिश झुलसा रही है, वहीं मौसम विभाग ने आने वाले दो दिनों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। राज्य के पांच बड़े शहरों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बिलासपुर बना 'हॉट चैंबर', रायपुर में भी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी
पिछले 24 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ का बिलासपुर जिला सबसे गर्म रहा, जहां पारा 44.4°C दर्ज किया गया। राजधानी रायपुर की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है; यहाँ आज तापमान 45°C तक पहुंचने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि न केवल दिन बल्कि रातें भी 'वार्म नाइट' (गर्म रात) की श्रेणी में रहने वाली हैं, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे चैन नहीं मिलेगा।
प्रमुख शहरों का तापमान एक नज़र में:
बिलासपुर: 44.4°C (सबसे गर्म)
रायपुर: 45°C (संभावित)
अंबिकापुर: 22.5°C (न्यूनतम तापमान, सबसे ठंडा इलाका)
राहत की उम्मीद: अंधड़ और बारिश की चेतावनी
भीषण लू के बीच राहत की खबर यह है कि उत्तर प्रदेश और बंगाल-ओडिशा क्षेत्र में बने चक्रवाती सिस्टम के कारण छत्तीसगढ़ के मौसम में बदलाव आने वाला है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए चेतावनी जारी की है:
तेज हवाएं: प्रदेश के कुछ हिस्सों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चल सकती है।
गरज-चमक: आकाशीय बिजली गिरने (Lightning) की आशंका जताई गई है।
हल्की बारिश: मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में छिटपुट वर्षा होने से तापमान में 1 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है।

क्यों धधक रहा है छत्तीसगढ़?
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, विदर्भ से लेकर दक्षिण भारत तक एक 'ट्रफ लाइन' सक्रिय है। साथ ही, बंगाल की खाड़ी की ओर से आ रही शुष्क हवाओं ने नमी को खत्म कर दिया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के ऊपर बना वेदर सिस्टम राज्य में अस्थिरता पैदा कर रहा है, जिसके कारण लू और आंधी का 'कॉम्बो' देखने को मिल रहा है।
क्या होती है हीट वेव? तकनीकी रूप से, जब मैदानी इलाकों का तापमान 40°C से ऊपर चला जाए और सामान्य से 4.5°C से 6.4°C अधिक हो, तो उसे 'हीट वेव' कहते हैं। यदि तापमान 47°C को पार कर जाए, तो उसे 'सीवियर हीट वेव' (अत्यंत भीषण लू) घोषित किया जाता है।
सावधानी ही बचाव है
प्रचंड गर्मी और लू (Heatstroke) को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और मौसम केंद्र ने एडवाइजरी जारी की है:
दोपहर 12 से 4 बजे तक: अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें।
हाइड्रेशन: प्यास न लगने पर भी पर्याप्त पानी, ओआरएस या नींबू-पानी का सेवन करें।
सुरक्षा: बाहर निकलते समय सिर को गीले कपड़े या टोपी से ढंकें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
अगले तीन दिनों तक मध्य छत्तीसगढ़ में लू का प्रकोप बना रहेगा, लेकिन उसके बाद होने वाली संभावित बारिश तपती धरती को थोड़ी शांति दे सकती है। तब तक, प्रदेशवासियों को कुदरत के इन दोनों मिजाजों के बीच संभलकर रहने की जरूरत है।

