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आत्मनिर्भर बनाने दिया जा रहा सिलाई प्रशिक्षण
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छत्तीसगढ़

कौशल विकास से सशक्त बनेंगी शाला त्यागी बालिकाएं

भारत सरकार की नाव्या पायलट परियोजना के तहत 16–18 वर्ष की शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 08 Apr 2026, 03:43 PM · अपडेट: 03 Nov 2026, 02:29 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
भारत सरकार की नवीनतम पायलट परियोजना नाव्या के अंतर्गत जिले में 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग की शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने कौशल विकास से जोड़ते हुए उन्हें रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले में आईटीआई लभराखुर्द को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में चयनित किया गया है, जहां 18 मार्च से सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। प्रथम चरण में 60 बालिकाओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। 'प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं को सिलाई-कढ़ाई की व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक जानकारी प्रदान की जा रही है, जिससे वे कौशल प्राप्त कर भविष्य में स्वरोजगार स्थापित कर सकें।
नाव्या परियोजना का उद्देश्य शाला त्यागी बालिकाओं को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत ये बालिकाएं स्वयं का रोजगार प्रारंभ करने अथवा अन्य रोजगार के अवसर प्राप्त करने में सक्षम होंगी। प्रशिक्षण के संबंध में अधिक जानकारी के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग कौशल विकास प्राधिकरण से सम्पर्क किया जा सकता है।
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