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13 साल पुरानी नियुक्ति रद्द : हाईकोर्ट सख्त, पक्षपात के आरोप सही पाए, दोबारा चयन के निर्देश

भाटापारा नगर पालिका में 2013 की राजस्व उप निरीक्षक नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 13 साल बाद रद्द कर दिया। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी और पक्षपात मानते हुए नए सिरे से पारदर्शी भर्ती के निर्देश दिए।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
13 Apr 2026, 04:58 PM
बिलासपुर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नगर पालिका परिषद भाटापारा में 13 वर्षों से पदस्थ राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने चयन प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां और पक्षपात की आशंका को सही मानते हुए यह अहम फैसला सुनाया। दरअसल, नगर पालिका परिषद भाटापारा, जिला बलौदा बाजार-भाटापारा द्वारा 16 नवंबर 2012 को राजस्व उप निरीक्षक (अनारक्षित) पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इस पद के लिए स्नातक एवं पीजीडीसीए योग्यता अनिवार्य रखी गई थी। भाटापारा निवासी देवेंद्र कुमार साहू ने समय-सीमा के भीतर सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था, लेकिन जब पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी हुई, तो उनका नाम किसी भी सूची में शामिल नहीं किया गया।

चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

मामले में यह भी सामने आया कि चयनित अभ्यर्थी सतीश सिंह चौहान के पिता उस समय नगर पालिका परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के पद पर कार्यरत थे। इतना ही नहीं, चयनित अभ्यर्थी का अनुभव प्रमाण पत्र भी उनके पिता द्वारा ही जारी किया गया था, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह गहराया।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायालय ने कहा कि जब याचिकाकर्ता का आवेदन रिकॉर्ड में मौजूद था, तब उसे पात्र/अपात्र सूची में शामिल नहीं करना गंभीर लापरवाही है। इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

साथ ही, न्यायालय ने यह भी माना कि पिता द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र चयन प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है और इससे पक्षपात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

2013 की नियुक्ति रद्द, नए सिरे से चयन के निर्देश

कोर्ट ने 23 मार्च 2013 को जारी नियुक्ति आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया दोबारा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए। साथ ही याचिकाकर्ता देवेंद्र कुमार साहू की उम्मीदवारी पर विधिवत विचार कर नया नियुक्ति आदेश जारी करने को कहा गया है।

RTI से खुला मामला

देवेंद्र कुमार साहू ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से याचिका दायर की थी। सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ईशान सलूजा ने बताया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि आवेदन प्राप्त होने के बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।

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