छत्तीसगढ़ के ग्राम पंचायत सचिवों के शासकीयकरण एवं संविलियन की वर्षों पुरानी मांग को लेकर अब मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। उच्च न्यायालय बिलासपुर ने पंचायत सचिवों की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन द्वारा गठित समिति को 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार पंचायत सचिवों के शासकीयकरण को लेकर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पूर्व में एक समिति गठित की गई थी। इस समिति को पंचायत सचिवों के नियमितीकरण एवं शासकीयकरण संबंधी विषय पर अंतिम निर्णय लेना था, लेकिन लंबे समय तक निर्णय नहीं होने से सचिवों में नाराजगी बढ़ती गई।
इसी विलंब को लेकर छत्तीसगढ़ पंचायत सचिव संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम दास घिदौड़े सहित अन्य साथियों की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट याचिका दायर की गई थी। रिट याचिका (सर्विस) क्रमांक 8608/2023 में याचिकाकर्ताओं ने पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की मांग को प्रमुखता से रखा था।
45 दिनों में निर्णय लेने का कोर्ट का आदेश
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे कई पंचायत सचिव
मंत्रालय पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में प्रहलाद चंद्राकर, जयदेव सिंह ठाकुर, गोवर्धन सिन्हा बकावंड, शत्रुघ्न लाल वर्मा, विजय कुमार वर्मा, मुकेश बघेल, धनेश वर्मा (जनपद पंचायत तिल्दा रायपुर), रामचरण धीवर (आरंग), राकेश कुमार क्षत्री, नागेंद्र कुमार सिंघरोल, ईश्वर पाठक, ब्यास नारायण लहरे (जिला मुंगेली), सुरेश कुमार साहू एवं कुम्भ लाल साहू (जनपद पंचायत गुंडारदेही, जिला बालोद) सहित अन्य पंचायत सचिव उपस्थित रहे।
पंचायत सचिवों को सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
पंचायत सचिवों ने कहा कि वे लंबे समय से शासन के समक्ष अपनी मांग रख रहे हैं और अब उन्हें उम्मीद है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद शासन स्तर पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
