Wednesday, 12 Aug 2026 भारत
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हाथियों का तांडव : बुजुर्ग को पटककर मारा, छात्राओं को रातों-रात हॉस्टल से सुरक्षित निकाला शराब के नशे में विवाद के बाद युवक की हत्या, सिर पर पत्थर से किए कई वार, पिता पुत्र गिरफ्तार रिमांड पर ED के हवाले पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, बघेल बोले– एजेंसियों के पास सबूत नहीं सावन में जतमई-घटारानी घूमने का प्लान? सावधान! भीड़ का फायदा उठाकर ज़ेवर उड़ाने वाली नागपुर की गैंग सक्रिय सुअरमार गढ़ में खुदाई के दौरान मिला रहस्यमयी धातु अवशेष, क्या छिपे हैं मध्यकालीन इतिहास के राज? हाथियों का तांडव : बुजुर्ग को पटककर मारा, छात्राओं को रातों-रात हॉस्टल से सुरक्षित निकाला शराब के नशे में विवाद के बाद युवक की हत्या, सिर पर पत्थर से किए कई वार, पिता पुत्र गिरफ्तार रिमांड पर ED के हवाले पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, बघेल बोले– एजेंसियों के पास सबूत नहीं सावन में जतमई-घटारानी घूमने का प्लान? सावधान! भीड़ का फायदा उठाकर ज़ेवर उड़ाने वाली नागपुर की गैंग सक्रिय सुअरमार गढ़ में खुदाई के दौरान मिला रहस्यमयी धातु अवशेष, क्या छिपे हैं मध्यकालीन इतिहास के राज?

संपादकीय

3 खबरें

साइकिल में सरकार : देश को दिखावटी नहीं ईमानदार पहल की जरूरत
देश में आर्थिक दबावों के बीच ईंधन बचाने, सादगी अपनाने और अनावश्यक खर्च कम करने जैसे संदेश लगातार दिए जा रहे हैं। नेता और अधिकारी साइकिल चलाकर प्रतीकात्मक रूप से बचत और संयम का संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जब उनके पीछे सुरक्षा और वाहनों का लंबा काफिला चलता है, तब यह दृश्य जनता के मन में कई सवाल भी खड़े करता है। कलमकार ने अपने इस विचारोत्तेजक लेख के माध्यम से इसी विरोधाभास को केंद्र में रखकर लिखते हैं कि अर्थव्यवस्था प्रतीकात्मक उपायों से नहीं सुधरती, ठोस नीतियों, उत्पादन, रोजगार और पारदर्शिता से मजबूत होती है।
कलमकार 14 May 2026
डॉ. नीरज गजेंद्र :  सूर्यवंशम से शादी में जरूर आना तक त्याग, सफलता और बदलते रिश्ते  की कहानी
गोंडा की एक सच्ची घटना इन दिनों चर्चा में है, जहां एक मजदूर पति ने अपनी पत्नी को एएनएम बनाने के लिए मजदूरी की, मवेशी और फसल तक बेच दी, लेकिन नौकरी लगने के बाद पत्नी ने साथ रहने से इनकार कर दिया। यह घटना बदलते रिश्तों और समाज की सोच पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। लेख में इस घटना की तुलना “सूर्यवंशम” और “शादी में जरूर आना” जैसी फिल्मों से करते हुए बताया गया है कि सफलता के बाद रिश्तों में सम्मान और संवेदनशीलता बची रहना कितना जरूरी है।
कीर्तिमान नेटवर्क 09 May 2026
मलय बेनर्जी का लिखा : मनुष्य होने की योग्यता और समाज का बदलता चेहरा
लेखक ने बंगाल की सामाजिक परिस्थितियों के माध्यम से मनुष्यता, संस्कार और हिंसा पर गहन विचार व्यक्त किए हैं। उनके अनुसार खेल मानव की हिंसक प्रवृत्तियों का रचनात्मक रूपांतरण है, लेकिन जब यही खेल उन्माद और राजनीति का माध्यम बन जाता है, तब समाज में अमानुषिकता और हिंसा बढ़ने लगती है।
कीर्तिमान ब्यूरो 07 May 2026
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