संपादकीय
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डॉ. नीरज गजेंद्र : सूर्यवंशम से शादी में जरूर आना तक त्याग, सफलता और बदलते रिश्ते की कहानी
गोंडा की एक सच्ची घटना इन दिनों चर्चा में है, जहां एक मजदूर पति ने अपनी पत्नी को एएनएम बनाने के लिए मजदूरी की, मवेशी और फसल तक बेच दी, लेकिन नौकरी लगने के बाद पत्नी ने साथ रहने से इनकार कर दिया। यह घटना बदलते रिश्तों और समाज की सोच पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। लेख में इस घटना की तुलना “सूर्यवंशम” और “शादी में जरूर आना” जैसी फिल्मों से करते हुए बताया गया है कि सफलता के बाद रिश्तों में सम्मान और संवेदनशीलता बची रहना कितना जरूरी है।
मलय बेनर्जी का लिखा : मनुष्य होने की योग्यता और समाज का बदलता चेहरा
लेखक ने बंगाल की सामाजिक परिस्थितियों के माध्यम से मनुष्यता, संस्कार और हिंसा पर गहन विचार व्यक्त किए हैं। उनके अनुसार खेल मानव की हिंसक प्रवृत्तियों का रचनात्मक रूपांतरण है, लेकिन जब यही खेल उन्माद और राजनीति का माध्यम बन जाता है, तब समाज में अमानुषिकता और हिंसा बढ़ने लगती है।