कलमकार
शायर बशीर बद्र नहीं रहे : महासमुंद को कहते थे ‘घर जैसा शहर’; ग़ज़ल सुनकर भावुक होकर रो पड़े थे
उर्दू ग़ज़ल के मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में भोपाल में निधन हो गया। वे लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित…
बढ़ती आत्महत्याओं पर पढ़िए डॉ. नीरज गजेंद्र का विचारोत्तेजक विश्लेषण मुश्किल वक्त गुज़र जाएगा, जीवन बना रहना चाहिए
जब समाज में संवाद कम होने लगता है, तब अवसाद बढ़ने लगता है। पहले गांवों में चौपाल होती थी। परिवार साथ बैठता था। दुख साझा…
कलमकार : सियासत की खिचड़ी में तड़का तेज, परोसने का इंतजार बाकी
छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों अटकलों और अंदरूनी समीकरणों के दौर से गुजर रही है। मंत्रिमंडल बदलाव की चर्चा फिर गर्म है। …
जहां आवाज कम हो जाए, समझ लीजिए वहां फुसफुसाहटें काम कर रही हैं ... कुर्सियों के नीचे सरकती फाइलें
हर सूबे की अपनी एक आवाज होती है…कुछ खबरें मंच से बोली जाती हैं, कुछ प्रेस नोट में लिखी जाती हैं और कुछ गलियारों, बंद कम…
डॉ. नीरज गजेंद्र : सूर्यवंशम से शादी में जरूर आना तक त्याग, सफलता और बदलते रिश्ते की कहानी
गोंडा की एक सच्ची घटना इन दिनों चर्चा में है, जहां एक मजदूर पति ने अपनी पत्नी को एएनएम बनाने के लिए मजदूरी की, मवेशी और…
मलय बेनर्जी का लिखा : मनुष्य होने की योग्यता और समाज का बदलता चेहरा
लेखक ने बंगाल की सामाजिक परिस्थितियों के माध्यम से मनुष्यता, संस्कार और हिंसा पर गहन विचार व्यक्त किए हैं। उनके अनुसार …