मलय बेनर्जी का लिखा : मनुष्य होने की योग्यता और समाज का बदलता चेहरा
लेखक ने बंगाल की सामाजिक परिस्थितियों के माध्यम से मनुष्यता, संस्कार और हिंसा पर गहन विचार व्यक्त किए हैं। उनके अनुसार खेल मानव की हिंसक प्रवृत्तियों का रचनात्मक रूपांतरण है, लेकिन जब यही खेल उन्माद और राजनीति का माध्यम बन जाता है, तब समाज में अमानुषिकता और हिंसा बढ़ने लगती है।
✍️ कीर्तिमान ब्यूरो 07 May 2026