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अवैध रेत उत्खनन
अवैध रेत उत्खनन
बलरामपुर-रामानुजगंज

माफियाओं का कहर : पांगन नदी का सीना चीर रही मशीनें, अवैध रेत उत्खनन से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

पांगन नदी के महुआ घाट क्षेत्र में कथित रूप से पोकलेन मशीनों से अवैध रेत खनन हो रहा है, जिससे नदी की धारा प्रभावित हो रही है, किनारों पर कटाव बढ़ रहा है और भू-जल स्तर गिरने की आशंका जताई जा रही है। भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की हालत खराब हो गई है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन मौन है, जिससे आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों ने जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
07 May 2026, 12:55 PM
रामानुजगंज

विकासखंड के ग्राम पचवाल में बहने वाली पांगन नदी इन दिनों रेत माफियाओं के निशाने पर है। महुआ घाट पर कथित रूप से पोकलेन मशीनों के जरिए किए जा रहे अवैध रेत उत्खनन ने अब एक गंभीर विवाद का रूप ले लिया है। नियमों को ताक पर रखकर दिन-रात निकाली जा रही रेत से न केवल प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों का धैर्य भी अब जवाब देने लगा है।

नियमों की धज्जियां और पर्यावरण पर प्रहार

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि खनन माफिया बिना किसी डर के नदी के बीचों-बीच भारी मशीनों का उपयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पोकलेन मशीनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से नदी की धारा प्रभावित हो रही है और किनारों पर भारी कटाव शुरू हो गया है। सबसे बड़ी चिंता भू-जल स्तर को लेकर है; आशंका जताई जा रही है कि यदि इसी तरह उत्खनन जारी रहा, तो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

सड़कों की दुर्दशा और बढ़ते खतरे

अवैध उत्खनन का असर केवल नदी तक सीमित नहीं है। भारी भरकम रेत से लदे वाहनों की चौबीसों घंटे आवाजाही ने ग्रामीण सड़कों को छलनी कर दिया है। धूल के गुबार और अनियंत्रित गति से चलने वाले ट्रकों के कारण स्थानीय लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है, जिससे हर समय किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल और आंदोलन की चेतावनी

हैरानी की बात यह है कि सरेआम हो रहे इस खेल पर खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन मौन साधे हुए है। अधिकारियों की इस निष्क्रियता ने उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

"अगर प्रशासन ने जल्द ही इन मशीनों को जब्त नहीं किया और उत्खनन नहीं रोका, तो हम सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।" — स्थानीय ग्रामीण

ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और कलेक्टर सहित उच्चाधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर्यावरणीय दोहन को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

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