नोएडा के एक निजी कंपनी परिसर में हाल ही में उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर गाड़ियों में आग लगा दी और मौके पर तोड़फोड़ भी की, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए। सरकार की ओर से इस घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पहलुओं की जांच के लिए विशेष टीमों को लगाया गया।
घटनाक्रम का मास्टरमाइंड
जांच के दौरान पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया है कि यह पूरी घटना सिर्फ एक श्रमिक आंदोलन का हिस्सा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। इसी सिलसिले में जांच में एक नाम सामने आया—आदित्य आनंद उर्फ “रस्टी”, जिसे इस पूरे घटनाक्रम का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, आदित्य आनंद बिहार के हाजीपुर का रहने वाला है और उसकी उम्र लगभग 28 वर्ष बताई जा रही है। उसने NIT जमशेदपुर से B.Tech किया है और पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रह चुका है। वह पहले Genpact जैसी कंपनी में कार्यरत था।
लगातार बदल रहा था लोकेशन
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। आखिरकार उसे तमिलनाडु के त्रिच्चिरापल्ली रेलवे स्टेशन से देर रात करीब 1:40 बजे गिरफ्तार किया गया। बताया गया कि उसे पकड़ने के लिए यूपी पुलिस और एसटीएफ की कई टीमें लगातार काम कर रही थीं।
इस मामले में थाना फेस-2, नोएडा में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य गंभीर धाराएं शामिल हैं। साथ ही आर्म्स एक्ट से जुड़े प्रावधान भी लगाए गए हैं।
आरोपियों से पूछताछ
अधिकारियों के अनुसार, अब एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि इस कथित साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे, और क्या यह घटना केवल स्थानीय विरोध तक सीमित थी या इसके पीछे कोई संगठित योजना थी। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना की वास्तविक योजना क्या थी और इसे किस स्तर पर अंजाम दिया गया।

