रायगढ़ जिले में पुलिस ने अवैध कबाड़ (स्क्रैप) के बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए लगभग 21 लाख रुपये मूल्य का भारी मात्रा में स्क्रैप जब्त किया है। इस कार्रवाई में कुल 89.28 टन कबाड़ बरामद किया गया, जिसे अलग-अलग स्थानों पर चार ट्रकों और एक लावारिस वाहन से पकड़ा गया। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में अवैध कबाड़ कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पूंजीपथरा थाना क्षेत्र और आसपास के औद्योगिक इलाकों में बिना वैध दस्तावेजों के कबाड़ का अवैध परिवहन किया जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद डीएसपी सुशांतो बनर्जी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अलग-अलग स्थानों पर घेराबंदी कर जांच अभियान चलाया।
चार ट्रकों से पकड़ा गया अवैध कबाड़
जांच के दौरान पुलिस ने कई ट्रकों को रोका और उनमें लदे स्क्रैप के दस्तावेज मांगे, लेकिन किसी भी वाहन चालक के पास वैध कागजात नहीं पाए गए।
- अग्रोहा प्लांट के पास एक ट्रक से लगभग 25 टन 510 किलो कबाड़ बरामद किया गया। चालक की पहचान नीरज कुमार (औरंगाबाद) के रूप में हुई, लेकिन वह कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
- तमनार चौक के पास एक अन्य ट्रक से 24 टन 200 किलो कबाड़ जब्त किया गया, जिसे अबताब खान (सरगुजा) चला रहा था।
- महालक्ष्मी काटिंग प्रा. लि. के पास जांच के दौरान एमडी अलीम (पलामू, झारखंड) के ट्रक से 4 टन 950 किलो स्क्रैप मिला।
- गेरवानी सलासर चौक पर सुभाष शर्मा (बरगढ़) के ट्रक से 11 टन कबाड़ पकड़ा गया।
इन सभी मामलों में ट्रक चालकों के पास माल के परिवहन से जुड़े कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले, जिससे संदेह और गहरा गया कि यह स्क्रैप अवैध तरीके से एकत्र और परिवहन किया जा रहा था।
लावारिस ट्रक से भी बड़ा खुलासा
इसी अभियान के दौरान गेरवानी सलासर चौक के पास एक ट्रक संदिग्ध हालत में खड़ा मिला, जिसमें लगभग 23 टन 620 किलो कबाड़ लोड था। इस वाहन का कोई चालक या मालिक मौके पर मौजूद नहीं था और न ही उसकी पहचान तत्काल हो सकी। पुलिस ने वाहन को लावारिस मानते हुए जब्त कर लिया और उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत कार्रवाई की गई।
कुल 89 टन से अधिक स्क्रैप जब्त
पूरे अभियान में पुलिस ने कुल 89.28 टन कबाड़ जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई जा रही है। सभी वाहनों और स्क्रैप को पुलिस ने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।
जांच जारी
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह कबाड़ आखिर किन स्रोतों से इकट्ठा किया गया था और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। साथ ही जिन वाहन मालिकों और व्यापारियों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है।
