बस्तर की पहचान अब केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यहाँ के युवा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवाने को तैयार हैं। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की एक अनूठी पहल के तहत, जगदलपुर स्थित विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय (सेजस) में छात्रों के लिए एक विशेष तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अंचल के बच्चों को 21वीं सदी की चुनौतियों और डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।
कलेक्टर ने बढ़ाया उत्साह: 'नवाचार ही भविष्य की कुंजी'
कार्यक्रम के दौरान बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के दौर में तकनीकी ज्ञान केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रचनात्मक सोच और नवाचार के माध्यम से ही भविष्य की बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। कलेक्टर ने छात्रों को आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन उन्हें आधुनिक संसाधनों से लैस करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रैक्टिकल लर्निंग और 'डिजाइन थिंकिंग' पर जोर
इस कार्यशाला में विवेकानंद स्कूल के 25 चुनिंदा छात्रों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'प्रैक्टिकल लर्निंग' पद्धति रही। किताबी ज्ञान से हटकर छात्रों ने:
आर्डुइनो (Arduino): माइक्रोकंट्रोलर के माध्यम से छोटे रोबोटिक मॉडल बनाना सीखा।
बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स: सर्किट डिजाइनिंग और सेंसर के उपयोग की बारीकियां समझीं।
डिजाइन थिंकिंग: वास्तविक जीवन की समस्याओं को पहचानना और तकनीक के जरिए उनके समाधान ढूंढने की प्रक्रिया पर काम किया।
AI और डेटा प्रेडिक्शन की मिली बारीकियां
वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी समझ के साथ-साथ कंप्यूटर विजन और डेटा प्रेडिक्शन जैसे जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाया। इसके अलावा, तकनीक के नैतिक उपयोग (Ethical AI) पर भी विशेष चर्चा की गई, ताकि छात्र जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बन सकें। टीमवर्क और समस्या समाधान के कौशल विकसित करने के लिए कई ग्रुप एक्टिविटीज भी आयोजित की गईं।
शिक्षकों का भी हुआ सशक्तिकरण
इस पहल की सफलता को भविष्य में भी बनाए रखने के लिए केवल छात्रों को ही नहीं, बल्कि शिक्षकों को भी तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य स्कूल में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहाँ शिक्षक आगे चलकर स्वयं छात्रों का मार्गदर्शन कर सकें और उन्हें नवीनतम तकनीकों से अपडेट रख सकें।
निष्कर्ष: बस्तर के लिए नई दिशा
संजय मार्केट के पास स्थित इस स्कूल में हुई यह कार्यशाला बस्तर के युवाओं के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स के माध्यम से जब बच्चों ने खुद अपने सर्किट तैयार किए, तो उनके चेहरे पर एक नया आत्मविश्वास नजर आया। यह पहल न केवल छात्रों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाएगी, बल्कि उनमें लीडरशिप और क्रिएटिविटी के नए बीज बोएगी, जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं।

