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बेहाल गौवंश : भीषण गर्मी में बिना चारा-पानी भटकते मवेशी, प्लास्टिक मिश्रित डस्ट बना सहारा; स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा
बेहाल गौवंश : भीषण गर्मी में बिना चारा-पानी भटकते मवेशी, प्लास्टिक मिश्रित डस्ट बना सहारा; स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा

बेहाल गौवंश : भीषण गर्मी में बिना चारा-पानी भटकते मवेशी, प्लास्टिक मिश्रित डस्ट बना सहारा; स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा

महासमुंद के NH-353 क्षेत्र में चारे की कमी के चलते गौवंश राइस मिल की हानिकारक डस्ट खाने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में पानी और छाया के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल चारा, पानी और संरक्षण की व्यवस्था की मांग की है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
07 Apr 2026, 05:10 PM
महासमुंद

महासमुंद जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-353 के आसपास एक बेहद चिंताजनक और संवेदनशील स्थिति सामने आई है, जहां गौवंश भूख और उपेक्षा के बीच जीने को मजबूर नजर आ रहे हैं। चारे के अभाव में ये मूक पशु खुले में पड़ी राइस मिल की डस्ट को ही अपना भोजन बना चुके हैं। भीषण गर्मी और तपती धूप में बिना पानी और छाया के ये गायें डस्ट के ढेरों पर खड़ी होकर उसे खाती हुई दिखाई दे रही हैं। यह दृश्य  पशु क्रूरता की ओर इशारा करता है, और प्रशासनिक लापरवाही की भी पोल खोलता है।

खतरे की घंटी है डस्ट का जहर

राइस मिल से निकलने वाली डस्ट में भले ही भूसा और अधपका (बोदरा) धान जैसे तत्व होते हैं, लेकिन इसके साथ प्लास्टिक, रसायन और अन्य हानिकारक पदार्थ भी मिश्रित रहते हैं। पशु विशेषज्ञों के अनुसार, यह असंतुलित और दूषित आहार गौवंश के पाचन तंत्र, रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकता है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि डस्ट के ढेर के आसपास प्लास्टिक और अन्य कचरा भी फैला हुआ है, जिससे स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है।

चारे की किल्लत या व्यवस्था की विफलता

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हरे चारे और वैकल्पिक भोजन की समुचित व्यवस्था नहीं है। गौठानों और पशु आश्रयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही, जिसके चलते गौवंश खुले में भटकने और ऐसे अस्वस्थ विकल्पों पर निर्भर होने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गौवंश के लिए तत्काल चारा, पानी और छाया की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि इस प्रकार की अमानवीय स्थिति से उन्हें राहत मिल सके।

पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी खतरा

पशुपालकों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि राइस मिल की डस्ट को खुले में फेंकना न केवल पशुओं के लिए खतरनाक है, बल्कि यह आसपास के पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा करता है। धूल और कचरे के मिश्रण से वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

प्रशासन मौन, नाराजगी बढ़ी

हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम या स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश और नाराजगी बढ़ती जा रही है।

यह मामला सिर्फ एक स्थान तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में पशु प्रबंधन, पर्यावरण संतुलन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह स्थिति न केवल गौवंश के लिए जानलेवा साबित होगी, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक संकट का रूप भी ले सकती है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मूक पुकार को सुन पाएगा या फिर यह दर्द यूं ही अनसुना रह जाएगा?

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