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लिलेसर गांव में साध्वी राधिका किशोरी
लिलेसर गांव में साध्वी राधिका किशोरी
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साध्वी राधिका किशोरी : अधर्म की कमाई अंततः दुख देती और धर्म ही मोक्ष का सच्चा मार्ग

ग्राम लिलेसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में साध्वी राधिका किशोरी ने गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग के माध्यम से धर्म, सत्य और सदाचार का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि अधर्म से दुख और धर्म से मोक्ष प्राप्त होता है। कथा में बड़ी संख्या में दूरदराज के श्रद्धालु शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ ले रहे हैं।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 22 Apr 2026, 06:34 PM · अपडेट: 14 Sep 2026, 10:34 PM
पिथौरा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

पिथौरा क्षेत्र के ग्राम लिलेसर में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। गौरी गौरा चौक बीच पारा समिति एवं समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में 20 से 26 अप्रैल तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया है। इस भक्ति ज्ञान यज्ञ में अयोध्या धाम से पधारी साध्वी राधिका किशोरी अपने ओजस्वी श्रीमुख से कथा अमृत की अविरल धारा प्रवाहित कर रही हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ अर्जित कर रहे हैं।

कथा के दौरान साध्वी राधिका किशोरी ने श्रीमद्भागवत महात्म्य का गहन और सरल व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए इसे केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक बताया। उन्होंने ‘सच्चिदानंद’ स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘सत’ यानी सत्य, ‘चित्त’ यानी चेतना और ‘आनंद’ यानी परम सुख इन तीनों का समन्वय ही मनुष्य को ईश्वर के समीप ले जाता है।

कथा में गोकर्ण और धुंधकारी प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन करते हुए साध्वी जी ने बताया कि यह कथा मनुष्य के कर्म और उसके परिणामों का जीवंत उदाहरण है। धुंधकारी ने जीवन भर अधर्म, लालच और दुराचार का मार्ग अपनाया, जिसके कारण उसे मृत्यु के बाद भी मुक्ति नहीं मिली और वह प्रेत योनि में भटकता रहा। वहीं उसके भाई गोकर्ण धर्मपरायण, सत्यनिष्ठ और ईश्वर भक्त थे। जब गोकर्ण को अपने भाई की पीड़ा का ज्ञान हुआ, तो उन्होंने उसे मोक्ष दिलाने का संकल्प लिया।

गोकर्ण द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विशेष महत्व बताते हुए साध्वी जी ने कहा कि कथा के प्रत्येक दिन धुंधकारी की आत्मा बांस की सात गांठों में प्रवेश कर कथा श्रवण करती रही। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, उसके पाप क्षीण होते गए और सातवें दिन कथा पूर्ण होते ही बांस की सभी गांठें टूट गईं, जिससे उसे प्रेत योनि से मुक्ति प्राप्त हो गई। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीमद्भागवत कथा में इतनी दिव्य शक्ति है कि वह सबसे पापी जीव को भी मोक्ष प्रदान कर सकती है।

धर्म और अधर्म की कमाई पर प्रकाश डालते हुए साध्वी राधिका किशोरी ने कहा कि अधर्म से अर्जित धन और वैभव भले ही कुछ समय तक सुखद प्रतीत हो, लेकिन उसका परिणाम अंततः दुख, अशांति और पीड़ा के रूप में सामने आता है। धुंधकारी इसका सजीव उदाहरण है। इसके विपरीत धर्म, सत्य और ईमानदारी से अर्जित की गई कमाई मनुष्य को आत्मिक शांति, सम्मान और अंततः मोक्ष की ओर अग्रसर करती है। गोकर्ण का जीवन इस सत्य का प्रमाण है, जिन्होंने धर्म के मार्ग पर चलकर न केवल स्वयं को उन्नत किया, बल्कि अपने भाई का भी उद्धार किया।

साध्वी जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में धर्म, सत्य और सदाचार को अपनाएं। उन्होंने कहा कि जीवन में केवल धन की नहीं, बल्कि पुण्य की भी कमाई आवश्यक है। अधर्म से अर्जित संपत्ति क्षणिक सुख देती है, जबकि धर्म से कमाया गया पुण्य जीवन भर और मृत्यु के बाद भी साथ देता है।

इस धार्मिक आयोजन में लिलेसर ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों बुंदेली, भुरकोनी, कोल्दा, पिथौरा, बागबाहरा, महासमुंद, बसना, सराईपाली सहित उड़ीसा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचकर कथा का रसपान कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भक्ति, ज्ञान और आत्मचिंतन की अनूठी अनुभूति स्पष्ट रूप से देखी जा रही है।

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