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दिव्य कुंड : जहां का पानी पीने से मोक्ष मिलने का दावा, जानिए कैसे और कब पहुंचें यहां

यात्रा भगवान शिव के दर्शन तक सीमित नहीं है, यहां स्थित दिव्य कुंडों का भी विशेष धार्मिक महत्व है। उदक कुंड और अमृत कुंड सहित पांच पवित्र जल स्रोतों के दर्शन और जल का स्पर्श जीवन के पापों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग माना जाता है। यह खबर आपको न सिर्फ इन कुंडों की महिमा बताएगी, बल्कि यात्रा के दौरान क्या करें इसका भी मार्गदर्शन देगी।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
22 Apr 2026, 09:10 AM
नई दिल्ली
जल्द आ रहा है सारांश सुनने की सुविधा जल्द उपलब्ध होगी

उत्तराखंड के हिमालयी आंचल में बसे केदारनाथ धाम की यात्रा हर श्रद्धालु के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव होती है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ मंदिर और चार धामों में प्रमुख इस तीर्थ का महत्व सदियों से बना हुआ है। यहां पहुंचते ही ऐसा लगता है जैसे प्रकृति और परमात्मा का साक्षात संगम हो रहा हो। लेकिन केदारनाथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण और अक्सर अनदेखा पहलू है] यहां स्थित पवित्र कुंड, जिनके बारे में मान्यता है कि इनका जल जीवन के पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

Image caption

उदक कुंड: अंतिम समय का अमृत

मंदिर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित उदक कुंड श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस कुंड में एक शिवलिंग भी स्थापित है, जहां भक्त जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि इस कुंड का जल अत्यंत पवित्र और मोक्षदायक होता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के अंतिम समय में उसके मुख में इस जल की कुछ बूंदें डाल दी जाएं, तो वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो सकता है। यही कारण है कि श्रद्धालु इस कुंड का जल अपने साथ घर भी लेकर जाते हैं।

उदक कुंड से जल लेते समय स्वच्छ पात्र का उपयोग करें

  • जल को श्रद्धा के साथ सुरक्षित रखें
  • भीड़ के समय धैर्य बनाए रखें

अमृत कुंड : रोग और दोष से मुक्ति

केदारनाथ के पास स्थित अमृत कुंड अपने नाम की तरह ही चमत्कारी माना जाता है। यहां का जल रोग निवारण और शारीरिक कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति इस कुंड के जल को अपने ऊपर छिड़कता है, तो उसके रोग और दोष समाप्त हो सकते हैं। यही कारण है कि श्रद्धालु यहां स्नान नहीं, बल्कि जल का आचमन और छिड़काव करते हैं।

जल का सम्मान करें, अनावश्यक अपव्यय न करें

  • स्नान के बजाय प्रतीकात्मक रूप से जल का उपयोग करें
  • पर्यावरण की स्वच्छता बनाए रखें

अन्य पवित्र कुंड : आस्था के पांच आयाम

केदारनाथ क्षेत्र में केवल ये दो ही नहीं, बल्कि कुल पांच कुंडों का उल्लेख मिलता है हंस कुंड, रेतस कुंड और हवन कुंड भी इनमें शामिल हैं।

  • हंस कुंड: मान्यता है कि यहां ब्रह्मा जी ने हंस का रूप धारण किया था। पितरों के तर्पण और अस्थि विसर्जन के लिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
  • रेतस कुंड: धार्मिक कथा के अनुसार, कामदेव के भस्म होने के बाद देवी रति ने यहां विलाप किया था। कहा जाता है कि “ॐ नमः शिवाय” के उच्चारण पर इस कुंड में जल में बुलबुले उठते हैं, जो इसकी दिव्यता का प्रतीक माने जाते हैं।
  • हवन कुंड: यह कुंड कभी मंदिर के सामने स्थित था, लेकिन 2013 की प्राकृतिक आपदा के बाद यह विलुप्त हो गया।

यात्रा को बनाएं पूर्ण और सार्थक

केदारनाथ की यात्रा केवल दर्शन तक सीमित न रखें। इन कुंडों के दर्शन, जल का स्पर्श और उससे जुड़ी आस्था को समझना इस यात्रा को और अधिक पूर्ण बनाता है।

जरूरी मार्गदर्शन :

  • यात्रा से पहले मौसम और स्वास्थ्य की तैयारी करें
  • प्लास्टिक और गंदगी फैलाने से बचें
  • स्थानीय परंपराओं और नियमों का पालन करें
  • दर्शन के साथ-साथ ध्यान और साधना के लिए समय निकालें

केदारनाथ केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है जहां हर कदम पर आस्था, प्रकृति और दिव्यता का अनुभव होता है। अगर आप इस यात्रा पर जा रहे हैं, तो इन दिव्य कुंडों के दर्शन और उनके जल का सम्मानपूर्वक उपयोग करना न भूलें क्योंकि यही अनुभव आपकी यात्रा को वास्तव में “मोक्ष मार्ग” बना सकता है।

 

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