महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम बाघामूड़ा में बीती मध्यरात्रि कुदरत का ऐसा कहर टूटा जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर ला दिया। क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान, कड़कती गर्जना और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई है। जहां एक ओर इस बेमौसम बारिश ने क्षेत्र के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, वहीं आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक ग्रामीण का आशियाना पूरी तरह जलकर खाक हो गया।
बाघामूड़ा के सरपंच ऐडीशन ठाकुर से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी प्रज्ञानंद देवांगन बीती रात अपने परिवार के साथ सो रहे थे। घर में उनकी पत्नी नंदिनी देवांगन, छोटा भाई प्रकाश देवांगन और दो नाबालिग बच्चे (उम्र 12 और 14 वर्ष) मौजूद थे।
रात करीब 3:30 बजे, जब पूरा इलाका गहरी नींद में था, तभी एक बेहद तेज और डरावनी गर्जना के साथ प्रज्ञानंद के मकान पर आकाशीय बिजली (गाज) गिरी। बिजली सीधे घर के किचन हिस्से पर गिरी और देखते ही देखते वहां भीषण आग लग गई।
सूझबूझ से बची पांच जानें, पर नहीं बचा पाए आशियाना
आग की लपटें और धुंआ उठते ही परिवार की नींद खुल गई। गनीमत यह रही कि प्रज्ञानंद और उनके भाई ने तत्परता दिखाई और बच्चों व पत्नी को लेकर तुरंत घर से बाहर भाग निकले। समय रहते बाहर निकलने की वजह से परिवार के सभी पांचों सदस्य सुरक्षित हैं, लेकिन वे अपनी आंखों के सामने अपने घर को स्वाहा होते देखने के लिए मजबूर हो गए।
घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हुए। स्थानीय निवासी लक्ष्मण चंद्राकर ने तुरंत अपने स्तर पर फायर ब्रिगेड को सूचित करने का प्रयास किया, वहीं सुबह करीब 5:30 बजे सरपंच ऐडीशन ठाकुर को घटना की जानकारी दी गई।
लकड़ी के पटाव ने भड़काई आग, 20 लाख का हुआ नुकसान
पीड़ित प्रज्ञानंद देवांगन इलेक्ट्रॉनिक सामान और मोटरसाइकिल साइड बैग के थोक व्यापार से जुड़े हुए हैं। घर के भीतर ही उनका काफी स्टॉक रखा हुआ था। प्रारंभिक आकलनों के अनुसार, इस आगजनी में घर के साथ-साथ कीमती सामान, नगदी और व्यापारिक स्टॉक मिलाकर लगभग 15 से 20 लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
'नेटवर्क' बना विलेन: सरपंच और ग्रामीणों ने बयां किया दर्द
इस पूरी घटना ने क्षेत्र की प्रशासनिक और तकनीकी कमियों को भी उजागर कर दिया है। सरपंच ऐडीशन ठाकुर ने रोष जताते हुए बताया:
"हमारे क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद दयनीय है। घटना के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन नेटवर्क न होने के कारण कॉल नहीं लग पा रहे थे। अगर समय रहते प्रशासन और दमकल विभाग से संपर्क हो जाता, तो गाड़ी एक घंटे पहले आ सकती थी और नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।"

ग्रामीणों में आक्रोश, मुआवजे और नेटवर्क सुधार की मांग
इस दर्दनाक हादसे के बाद से बाघामूड़ा और आसपास के ग्रामीणों में डर के साथ-साथ प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
पीड़ित देवांगन परिवार को आपदा प्रबंधन कोष से तुरंत उचित मुआवजा और राहत सामग्री दी जाए।
क्षेत्र में आए दिन होने वाली नेटवर्क की समस्या को सुधारा जाए ताकि आपातकाल में लोगों की जान-माल की रक्षा हो सके।
फिलहाल राजस्व विभाग की टीम को घटना की सूचना दे दी गई है, जो जल्द ही मौके पर पहुंचकर नुकसान का आधिकारिक पंचनामा तैयार करेगी।

