नगर में पेट्रोल और डीजल के स्टॉक में कमी के चलते पेट्रोल पंपों पर सीमित
मात्रा में ईंधन वितरण किया जा रहा है। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार यह
व्यवस्था किसी भी प्रकार की अफरातफरी से बचने और सभी तक ईंधन पहुंचाने के
उद्देश्य से लागू की गई है।
हर वाहन के लिए तय हुई सीमा—पेट्रोल पंपों की नई व्यवस्था लागू
पंप संचालकों के मुताबिक दोपहिया वाहनों को लगभग 2 लीटर पेट्रोल दिया जा रहा है, जबकि चारपहिया वाहनों को करीब 2000 रुपये तक का पेट्रोल या डीजल मिल रहा है। वहीं बड़े वाहनों जैसे ट्रकों को 150 से 200 लीटर तक डीजल दिया जा रहा है। सीमित स्टॉक के चलते यह व्यवस्था लागू की गई है।
हर वाहन के लिए तय हुई सीमा—पेट्रोल पंपों की नई व्यवस्था लागू
पंप संचालकों के मुताबिक दोपहिया वाहनों को लगभग 2 लीटर पेट्रोल दिया जा रहा है, जबकि चारपहिया वाहनों को करीब 2000 रुपये तक का पेट्रोल या डीजल मिल रहा है। वहीं बड़े वाहनों जैसे ट्रकों को 150 से 200 लीटर तक डीजल दिया जा रहा है। सीमित स्टॉक के चलते यह व्यवस्था लागू की गई है।
शहर में ज्यादा असर, गांवों में अभी राहत
यह स्थिति मुख्य रूप से नगरीय क्षेत्र में देखने को मिल रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में फिलहाल ऐसी समस्या सामने नहीं आई है। जानकारों का मानना है कि शहरों में आसपास के गांवों से भी लोग ईंधन भरवाने पहुंचते हैं, जिससे मांग अधिक हो जाती है और दबाव बढ़ता है।सप्लाई गड़बड़ाई बनी संकट की जड़
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि पहले जहां सुबह ऑर्डर देने पर उसी दिन शाम तक पेट्रोल-डीजल का लोड मिल जाता था, वहीं अब हालात यह हैं कि 4 से 5 दिन बाद सप्लाई पहुंच रही है। इस देरी के कारण पंपों में स्टॉक लगातार कम बना हुआ है और मांग के अनुसार आपूर्ति करना मुश्किल हो रहा है। पंप मालिकों के अनुसार यह समस्या उन्हें भी परेशान कर रही है और इसी वजह से आम लोगों को सीमित मात्रा में ईंधन देना पड़ रहा है।ताकि अगले डीजल स्टॉक के आते तक सभी का केाम चलता रहेकोई आदेश नहीं, पैनिक होने की जरूरत नहीं :लगातार गहराते ईंधन संकट के चलते आम लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। रोजमर्रा के कामकाज, आवागमन और आवश्यक सेवाओं पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। लोगों को जरूरत के अनुसार ईंधन नहीं मिल पाने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और सभी को जल्द स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
एसडीएम मार्कोले से चर्चा करने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा पेट्रोल या डीजल की सीमित आपूर्ति को लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। यह व्यवस्था पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा स्वयं की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में किसी प्रकार का पैनिक या अफवाह का माहौल नहीं है।
आम लोगों की बढ़ी चिंता, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

किसानों पर भी असर, खेती कार्य पर संकट के संकेत
ईंधन की कमी का असर अब खेती-किसानी पर भी दिखने लगा है। किसानों का कहना है कि पहले वे डिब्बों (झरकिन) में डीजल लेकर हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों में उपयोग करते थे, लेकिन अब जरकीन में डीजल आदि नहीं देने के कारण इसमें परेशानी आ रही है। इस छोटे और बड़े हार्वेस्टर संचालकों को नियमित डीजल नहीं मिल पा रहा है।खाद के बाद अब डीजल संकट :-
किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति आगे बनी रही तो जुताई और अन्य कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं। एक ओर खाद की कमी की चिंता पहले से बनी हुई है, वहीं अब डीजल-पेट्रोल ने उनकी चिंता को और बढ़ा दिया है। किसानों को डर है कि समय पर व्यवस्था नहीं सुधरी तो इसका असर उनकी फसल और भविष्य दोनों पर पड़ सकता है।

