बिहार की राजनीति के सबसे रंगीन और बेबाक किरदारों में शुमार तेज प्रताप यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और 'जनशक्ति जनता दल' के संस्थापक तेज प्रताप अब अपने राजनीतिक करियर को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें वह बाबा बागेश्वर (पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) से अपने भविष्य को लेकर गुहार लगाते दिख रहे हैं।
वीडियो कॉल पर 'भविष्य' की चर्चा
इंटरनेट पर वायरल हो रही 16 सेकेंड की इस क्लिप में तेज प्रताप यादव मुस्कुराते हुए बाबा बागेश्वर से वीडियो कॉल पर बात कर रहे हैं। वीडियो में उन्हें साफ कहते सुना जा सकता है— "बाबा, मेरा राजनीतिक भविष्य देख लीजिएगा।"
इस पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी गर्मजोशी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, "जरूर, आप जब भी आएंगे, हम और आप साथ बैठेंगे। इस विषय पर विस्तार से चर्चा होगी और एक-दो घंटे बात की जाएगी।" तेज प्रताप ने भी बाबा की इस बात पर पूरी सहमति जताई।
विरोध से 'शरण' तक का सफर
यह बदलाव इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि साल 2023 में जब बाबा बागेश्वर का पटना के नौबतपुर में कार्यक्रम तय हुआ था, तब तेज प्रताप उनके सबसे बड़े विरोधियों में से एक थे। उन्होंने तब पंडित धीरेंद्र शास्त्री को 'देशद्रोही' और 'डरपोक' तक कह दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने बाबा की तुलना विवादित बाबाओं (आसाराम और राम रहीम) से भी कर दी थी। आज वही तेज प्रताप अपना भविष्य जानने के लिए उन्हीं के दरबार में हाजिरी लगाने को बेताब दिख रहे हैं।
तेज प्रताप यादव: एक नजर में
तेज प्रताप का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उनके व्यक्तित्व के कुछ खास पहलू और करियर ग्राफ नीचे दिए गए हैं:
अनोखा अंदाज: वह कभी शिव भक्त तो कभी भगवान कृष्ण की वेशभूषा में नजर आकर जनता का ध्यान खींचते रहे हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े बेटे होने के नाते राजनीति उन्हें विरासत में मिली।
विधायी अनुभव: * 2015-2020: महुआ विधानसभा से विधायक।
2020-2025: हसनपुर विधानसभा से विधायक।
मंत्री पद: बिहार सरकार में स्वास्थ्य, वन एवं जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
नई पार्टी और हालिया चुनौतियां
एक विवादित बयान के बाद राजद (RJD) से निष्कासित होने के बाद तेज प्रताप ने 'जनशक्ति जनता दल' का गठन किया। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी के बैनर तले महुआ सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। शायद यही वजह है कि अब वह जमीन के साथ-साथ 'दैवीय' आशीर्वाद की तलाश में हैं ताकि अपने डूबते राजनीतिक करियर को फिर से चमका सकें।

