महासमुंद नगर पालिका द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आम नागरिकों की सुविधा के लिए बनाए गए सार्वजनिक मूत्रालय आज बदहाल स्थिति में पहुँच चुके हैं। जिनका उद्देश्य शहर में स्वच्छता को बढ़ावा देना और खुले में शौच की समस्या को खत्म करना था, वे अब लापरवाही और अनदेखी का शिकार दिखाई दे रहे हैं।
नगर पालिका द्वारा ये सुविधाएँ मुख्य रूप से बाजार क्षेत्रों, बस स्टैंड, सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बनाई गई थीं, ताकि आम नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित सुविधा मिल सके। अनुमान के अनुसार, पूरे नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 10 से 15 सार्वजनिक मूत्रालय बनाए गए हैं। हालांकि, इनकी सटीक संख्या का आधिकारिक रिकॉर्ड नगर पालिका प्रशासन के पास ही उपलब्ध है।
आमजन परेशानस्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकतर सार्वजनिक मूत्रालय की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। कई जगहों पर दरवाजे टूटे हुए हैं या पूरी तरह से गायब हैं, जिससे उपयोग करने वालों को असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति काफी परेशान करने वाली है।

बीमारी का खतरासाफ-सफाई की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। कई शौचालयों में लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण गंदगी और दुर्गंध फैली हुई है। पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से नियमित सफाई भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा नालियों के जाम होने और गंदे पानी के जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
सुविधाओ की कमी
रात के समय कई स्थानों पर रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है, जिससे इन जगहों पर असामाजिक गतिविधियों की आशंका बनी रहती है और सुरक्षा की समस्या उत्पन्न होती है। कई मूत्रालय तो इतने खराब हो चुके हैं कि वे उपयोग के लायक ही नहीं बचे हैं।
जनता का आरोपस्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उन्होंने कई बार नगर पालिका प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार कार्य नहीं हुआ है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सफाई व्यवस्था प्रभावित
स्वच्छ भारत मिशन जैसे राष्ट्रीय अभियान के तहत बनाए गए इन ढांचों की ऐसी स्थिति प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। यदि समय रहते इनकी मरम्मत और नियमित देखरेख नहीं की गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब आवश्यकता है कि नगर पालिका प्रशासन तत्काल इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सभी सार्वजनिक मूत्रालयों की मरम्मत, नियमित सफाई व्यवस्था, पानी और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करे। साथ ही जिम्मेदार कर्मचारियों की नियुक्ति और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि इन सुविधाओं को फिर से उपयोग योग्य बनाया जा सके और शहर में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
