एक दुर्लभ मेडिकल स्थिति ‘हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन’ में एक महिला के जुड़वां बच्चों के पिता अलग-अलग हो सकते हैं। डीएनए टेस्टिंग के जरिए इसका पता लगाया जाता है। यह घटना बेहद कम मामलों में सामने आई है, लेकिन यह विज्ञान की जटिल और दिलचस्प सच्चाई को उजागर करती है। क्या है यह अनोखा मामला : साल 2018 में National University of Colombia की एक लैब में ऐसा मामला सामने आया जिसने वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया। एक महिला अपने जुड़वां बच्चों के पिता की पहचान जानने पहुंची थी—लेकिन टेस्ट के नतीजे ने दिखाया कि दोनों बच्चों के पिता अलग-अलग हैं। इस स्थिति को मेडिकल साइंस में Heteropaternal Superfecundation कहा जाता है।
कितना दुर्लभ है यह : National Center for Biotechnology Information के अनुसार, पूरी दुनिया में अब तक ऐसे लगभग 20 केस ही दर्ज हुए हैं। यानी यह घटना बेहद दुर्लभ है, लेकिन असंभव नहीं।
कैसे होता है ऐसा, साधारण भाषा में समझें तो-
- एक ही मासिक चक्र (menstrual cycle) में महिला के शरीर से दो अंडे (eggs) निकलते
हैं
- अलग-अलग समय पर दो पुरुषों
के स्पर्म से ये अंडे निषेचित (fertilize) हो जाते हैं
- परिणाम: जुड़वां बच्चे, लेकिन
अलग-अलग पिता
डीएनए
टेस्ट से कैसे होता है खुलासा -
लैब में वैज्ञानिक एक जटिल प्रक्रिया के जरिए यह पता
लगाते हैं कि बच्चे का जैविक पिता कौन है:
- खून के सैंपल से डीएनए
निकाला जाता है
- डीएनए के खास हिस्सों (microsatellites) की जांच होती है
- Electrophoresis जैसी तकनीक
से डीएनए पैटर्न को पढ़ा जाता है
- मां, बच्चे और
संभावित पिता के डीएनए का मिलान किया जाता है
जब बच्चे का आधा डीएनए मां से और बाकी आधा किसी पुरुष से
मैच करता है, तब पितृत्व तय होता है।
विशेषज्ञ
क्या कहते हैं : लैब डायरेक्टर William Usaquen के मुताबिक हम 15
से 22 डीएनए पॉइंट्स की तुलना करते हैं। हर
पॉइंट एक पहचान की तरह काम करता है, जिससे पितृत्व की पुष्टि
होती है।
यह खबर एक हैरान करने वाला तथ्य नहीं, जागरूकता का
विषय भी है।
- पितृत्व विवाद में डीएनए
टेस्ट की अहमियत
- मानव शरीर की जटिलता और
विज्ञान की भूमिका
- दुर्लभ लेकिन संभव घटनाओं को समझने की जरूरत
