छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ACB-EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में हुए बहुचर्चित मैनपावर घोटाले में बड़ी कामयाबी हासिल की है। टीम ने इस मामले में संलिप्त 7 प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 11 मई तक कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया गया है।
भ्रष्टाचार की गंभीर धाराओं में केस दर्ज
जांच एजेंसी ने इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (बी), 8 समेत आईपीसी की संगीन धाराओं जैसे 467 (जालसाजी), 468, 471 और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया है।
क्या है 115 करोड़ का यह 'फर्जी' ओवरटाइम खेल?
यह पूरा मामला साल 2019 से 2024 के बीच का है। CSMCL के माध्यम से संचालित शराब दुकानों में प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए मैनपावर सप्लाई की जाती थी।
फर्जी भुगतान: जांच में खुलासा हुआ कि इन 5 सालों में कर्मचारियों को 'ओवरटाइम भत्ते' के नाम पर लगभग 115 करोड़ रुपये जारी किए गए।
बंदरबांट: चौंकाने वाली बात यह है कि यह मोटी रकम उन गरीब कर्मचारियों तक कभी पहुंची ही नहीं, जो दुकानों में काम कर रहे थे। इसके बजाय, अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलीभगत कर बिलों के जरिए इस राशि को आपस में बांट लिया।
ED की छापेमारी से खुला राज
इस घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब 28 सितंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी के दौरान तीन संदिग्ध व्यक्तियों से 28 लाख रुपये नगद बरामद किए। पूछताछ में पैसों के स्रोत का संतोषजनक जवाब न मिलने पर राज्य सरकार को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद EOW ने आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कर जांच की कमान संभाली।
नियमों के मुताबिक, यह राशि प्लेसमेंट एजेंसियों को इसलिए दी जाती थी ताकि वे इसे फील्ड कर्मचारियों को अतिरिक्त काम के बदले भुगतान कर सकें, लेकिन कागजों पर फर्जी बिल लगाकर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया गया। फिलहाल, रिमांड के दौरान ACB-EOW आरोपियों से पूछताछ कर इस घोटाले में शामिल कुछ 'बड़े चेहरों' तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।
