छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से रिश्तों के कत्ल की एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। लालबाग थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कविराज टोलागांव में एक सनकी पति ने अपनी ही पत्नी की कुल्हाड़ी (टंगिया) से वार कर नृशंस हत्या कर दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज 12 घंटे के भीतर हत्यारे पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह हृदयविदारक घटना 4 मई 2026 की सुबह की है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुबह लगभग 6:40 बजे जिला पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि कविराज टोलागांव में एक महिला की हत्या हो गई है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक रमेश पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। राहुल पारधी की शिकायत पर मर्ग कायम कर जब जांच शुरू की गई, तो परत दर परत खौफनाक सच्चाई सामने आने लगी।
वारदात की खौफनाक पटकथा
पुलिस की विवेचना में मृतका पूर्णिमा पारधी के पति रंजीत पारधी (38 वर्ष) का नाम मुख्य आरोपी के रूप में उभरा। जांच में पता चला कि आरोपी और मृतका की शादी करीब 12-13 साल पहले हुई थी और उनके तीन बच्चे भी हैं। हालांकि, पिछले एक साल से उनके रिश्तों में दरार आ गई थी।
आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसकी पत्नी उसे छोड़कर उसके चचेरे भाई सूरज पारधी के साथ रह रही थी। इसी रंजिश और बेवफाई के शक ने रंजीत को हत्यारा बना दिया। सोमवार की सुबह जब पूर्णिमा गांव के शासकीय शौचालय की ओर जा रही थी, तभी रंजीत अपनी टीवीएस मोपेड पर सवार होकर वहां पहुंचा। उसने घात लगाकर अपने पास रखी टंगिया से पूर्णिमा के सिर पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के कुशल निर्देशन में टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को हिरासत में लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से:
वारदात में प्रयुक्त टंगिया
टीवीएस मोपेड
घटना के समय पहने हुए रक्त रंजित कपड़े
बरामद कर लिए हैं। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
रिश्तों का दुखद अंत
नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन में लालबाग पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
"यह घटना समाज में बढ़ते आक्रोश और रिश्तों के बीच खत्म होते संवाद का परिणाम है। जहां एक ओर पति जेल की सलाखों के पीछे है, वहीं दूसरी ओर तीन मासूम बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया और पिता अपराधी बन गया।"
राजनांदगांव पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की इलाके में सराहना हो रही है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब आवेश और प्रतिशोध विवेक पर हावी होते हैं, तो उसका अंजाम केवल विनाश ही होता है।
