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हाथियों ने किया फसल नष्ट
हाथियों ने किया फसल नष्ट
छत्तीसगढ़

हाई अलर्ट : एक ही रात में 15 किसानों की फसलें तबाह, 130 से ज्यादा हाथियों का डेरा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में हाथियों की बढ़ती संख्या के कारण मानव–वन्यजीव संघर्ष गंभीर हो गया है। जिले में करीब 132 हाथी अलग-अलग इलाकों में घूम रहे हैं, जिनमें धर्मजयगढ़ वन मंडल सबसे ज्यादा प्रभावित है।हाल ही में हाथियों के दल ने कई गांवों में घुसकर धान और मक्के की फसलें बर्बाद कर दीं, जिससे लगभग 15 किसानों को भारी नुकसान हुआ। ग्रामीणों के प्रयासों के बावजूद हाथियों को तुरंत नहीं भगाया जा सका और वे सुबह तक खेतों में ही रहे।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
05 May 2026, 11:07 AM
रायगढ़
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में इन दिनों हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष की स्थिति गहराती जा रही है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, जिले में हाथियों की आमद ने अब एक गंभीर रूप ले लिया है, जहां 130 से भी अधिक हाथियों का दल अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। रविवार की रात हाथियों के लिए 'दावत' तो किसानों के लिए 'कयामत' साबित हुई, जब हाथियों ने कई गांवों में घुसकर तैयार फसलों को मटियामेट कर दिया।

तबाही का मंजर: धान और मक्के पर फेरा पानी

रविवार रात धर्मजयगढ़ वन मंडल के विभिन्न रेंजों में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। लगभग 15 किसानों की मेहनत पर हाथियों ने कुछ ही घंटों में पानी फेर दिया। हाथियों के दल ने न केवल धान और मक्के की फसल को अपना निवाला बनाया, बल्कि उसे पैरों तले रौंदकर पूरी तरह बर्बाद कर दिया।

कहां कितना हुआ नुकसान?

  • आमगांव (धर्मजयगढ़): यहाँ सबसे ज्यादा 5 किसानों की धान की फसल नष्ट हुई।

  • दर्रीडीह और ओंगना: 3 किसानों के खेतों में हाथियों ने धावा बोला।

  • छाल रेंज (लामीखार): यहाँ मक्के की फसल को भारी नुकसान पहुँचाया गया।

  • अन्य क्षेत्र: हाटी तेंदुमुडी, कुमा और क्रोंधा में भी कई किसानों की फसलें बर्बाद हुईं।

ग्रामीणों और वनकर्मियों ने मशालों और शोर के जरिए हाथियों को खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन हाथियों का दल टस से मस नहीं हुआ। सूरज की पहली किरण फूटने से ठीक पहले ही हाथी वापस घने जंगलों की ओर लौटे।

जंगलों में हाथियों का 'कुनबा' बढ़ा

वन विभाग के ताजा आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। वर्तमान में जिले के दो वन मंडलों में कुल 132 हाथी मौजूद हैं:

  1. धर्मजयगढ़ वन मंडल: यहाँ हाथियों की संख्या सबसे अधिक 94 है (31 नर, 37 मादा और 26 शावक)।

  2. रायगढ़ वन मंडल: यहाँ 38 हाथी सक्रिय हैं (5 नर, 26 मादा और 7 शावक)।

विशेषज्ञों का कहना है कि मादा हाथियों और शावकों की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि यह क्षेत्र अब हाथियों का स्थायी रहवास बनता जा रहा है। सबसे अधिक जमावड़ा घरघोड़ा रेंज के नवापारा टेंडा में है, जहाँ 20 हाथी एक साथ देखे गए हैं।

विभाग की तैयारी और मुनादी

बढ़ते खतरों को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। छाल रेंजर राजेश चौहान ने बताया कि 'हाथी मित्र दल' के जरिए प्रभावित गांवों में लगातार मुनादी (घोषणा) कराई जा रही है ताकि ग्रामीण रात के समय सतर्क रहें और जंगलों की ओर न जाएं।

"हम हाथियों के हर मूवमेंट पर तकनीकी और जमीनी स्तर से नजर रख रहे हैं। विभाग का प्राथमिक लक्ष्य जनहानि को रोकना और किसानों के नुकसान का उचित आकलन कर उन्हें जल्द मुआवजा दिलाना है।"

फिलहाल, राजस्व और वन विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर नुकसान का सर्वे कर रही हैं, ताकि पीड़ित किसानों को राहत दी जा सके। लेकिन हाथियों की यह बढ़ती तादाद आने वाले दिनों में और भी बड़े संकट का संकेत दे रही है।

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