दुनिया को अपनी तस्वीरों से सोचने पर मजबूर करने वाले महान फोटोग्राफ़र रघु राय अब हमारे बीच नहीं रहे। शनिवार को 83 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके जाने से सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक दौर समाप्त हुआ है, वो दौर जिसमें तस्वीरें सिर्फ देखी नहीं जाती थीं, पढ़ी जाती थीं।
रघु राय फ़ोटोग्राफ़ी
की दुनिया के ऐसे कल्ट फ़िगर थे, जिनकी हर तस्वीर
अपने आप में एक कहानी, एक विचार और एक दस्तावेज़ होती थी।
उम्र के अंतिम पड़ाव में भी उनका जुनून कम नहीं हुआ था वे लगातार सक्रिय रहे और
फोटोग्राफी के इतिहास को सहेजने में जुटे रहे।
संयोग से शुरू हुआ सफर, जुनून में बदल गया
रघु राय का जीवन इस बात का उदाहरण है कि कभी-कभी एक छोटा-सा
संयोग पूरी ज़िंदगी की दिशा बदल देता है। मूलतः सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने
वाले रघु राय ने अपने करियर की शुरुआत एक ड्राइंग इंस्ट्रक्टर के रूप में की थी।
लेकिन मन कहीं और था।
उनके बड़े भाई एस पॉल पहले से ही एक स्थापित फोटोग्राफ़र थे। 1966 में दिल्ली आना और भाई का कैमरा हाथ लगना, यहीं से किस्मत ने करवट ली। एक साधारण-सी घटना एक भागते हुए गधे के पीछे भागकर खींची गई तस्वीर ने इतिहास रच दिया। यही तस्वीर प्रतिष्ठित अखबार द लंदन टाइम्स में आधे पन्ने पर छपी और रघु राय को पहचान दिला गई।
पत्रकारिता में पहचान और ऊंचाइयों का सफर
रघु राय ने हिंदुस्तान
टाइम्स से अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की, लेकिन असली पहचान उन्हें द स्टेट्समैन
में मिली। यहीं उनकी तस्वीरों ने न सिर्फ जगह बनाई, बल्कि
असर भी पैदा किया।
जेपी आंदोलन के दौरान
खींची गई उनकी एक तस्वीर ने सत्ता को झुकने पर मजबूर कर दिया,
जब लाठीचार्ज से इनकार किया गया, तो उनकी
तस्वीर ने सच सामने ला दिया और संसद में माफी तक मांगनी पड़ी।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और ऐतिहासिक उपलब्धि
उनकी प्रतिभा की गूंज
भारत तक सीमित नहीं रही। विश्व विख्यात फोटोग्राफ़र हेनरी कार्टियर ब्रेस्सन ने उनकी तस्वीरों को
देखकर उन्हें प्रतिष्ठित संस्था मैग्नम फोटोज
से जोड़ लिया।
रघु राय इस प्रतिष्ठित
समूह से जुड़ने वाले पहले भारतीय बने और जीवन भर इस पहचान को गौरवान्वित करते रहे।
एक विरासत, जो
हमेशा जिंदा रहेगी
रघु राय अक्सर कहा करते
थे कि “तस्वीर खींचना आसान है, लेकिन उसे अर्थ
देना मुश्किल।” यही उनकी खासियत थी वे सिर्फ फोटो नहीं लेते थे, वे समय को कैद करते थे।
उनकी जिंदगी इस बात का
संदेश देती है कि जुनून, मेहनत और सही मौके का संगम
इंसान को कहाँ से कहाँ पहुंचा सकता है।

