छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। शहर के ऐतिहासिक और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने की दिशा में नगर निगम और जिला प्रशासन ने आज एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई की। अंबिकापुर के रिंग रोड स्थित पर्पल होटल द्वारा भाथु तालाब से निकलने वाले प्राकृतिक नाले पर किए गए अवैध कब्जे को चार जेसीबी मशीनों की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
विस्तार की आड़ में जल क्षेत्र को निगलने की कोशिश
यह पूरी कार्रवाई होटल संचालक मुकेश अग्रवाल द्वारा किए गए अतिक्रमण पर केंद्रित थी। आरोप है कि होटल के विस्तार के लिए संचालक ने प्राचीन भाथु तालाब के जल निकासी वाले नाले पर कब्जा कर लिया था। लगभग एक एकड़ की इस कीमती जमीन पर न केवल मिट्टी डालकर नाले को पाटने की कोशिश की जा रही थी, बल्कि वहां बाउंड्री वॉल बनाकर इसे पूरी तरह कब्जाने की तैयारी थी।
शिकायत मिलने पर जब नगर निगम आयुक्त ने मामले की जांच कराई, तो अतिक्रमण की पुष्टि हुई। प्रशासन द्वारा पूर्व में नोटिस जारी कर स्वयं अतिक्रमण हटाने का मौका दिया गया था, लेकिन संचालक की ढिठाई और निर्माण कार्य जारी रखने के कारण आज सुबह ही निगम की टीम भारी पुलिस बल और मशीनों के साथ मौके पर पहुंची।
भ्रष्टाचार और 'फर्जी पट्टे' के खेल पर सवाल
अंबिकापुर में यह कार्रवाई केवल एक अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। शहर में यह चर्चा आम है कि स्थानीय पटवारी और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों और तालाबों के फर्जी पट्टे तैयार किए जाते हैं।
"सवाल यह उठता है कि जब महीनों तक तालाब की जमीन को पाटा जा रहा था और बाउंड्री वॉल खड़ी की जा रही थी, तब संबंधित पटवारी और निगम के मैदानी अमले ने आंखें क्यों मूंद रखी थीं? क्या यह सब प्रशासनिक मौन की शह पर हो रहा था?"
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कब्जों के बाद अक्सर दस्तावेजों में हेरफेर कर करोड़ों की जमीन को निजी बताकर बेच दिया जाता है। इस मामले में पार्षद शुभम जायसवाल की सक्रियता और कलेक्टर से की गई शिकायत के बाद ही प्रशासन हरकत में आया।
रिंग बांध तालाब का भी बुरा हाल: रजिस्ट्री का फर्जीवाड़ा
अंबिकापुर में जल निकायों को निशाना बनाने का यह इकलौता मामला नहीं है। शहर के रिंग बांध तालाब को लेकर भी एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यहाँ आजादी इराकी नामक व्यक्ति द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पूरे तालाब की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का मामला सामने आया है।
तालाब को पाटने की साजिश की भनक लगते ही शहरवासियों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। वर्तमान में तहसील न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तालाब को पाटने पर स्टे (स्थगन आदेश) लगा दिया है, लेकिन भू-माफियाओं के हौसले पस्त होते नजर नहीं आ रहे हैं।
कार्रवाई से भू-माफियाओं में हड़कंप
आज की इस बड़ी कार्रवाई के बाद शहर के अन्य रसूखदारों और कब्जाधारियों में हड़कंप मचा हुआ है। नगर निगम प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि शहर के प्राकृतिक स्वरूप और जल स्रोतों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासनिक चेतावनी:
सरकारी जमीन और तालाबों पर किए गए सभी निर्माणों को चिन्हित किया जा रहा है।
फर्जी पट्टा बनाने वाले अधिकारियों की संलिप्तता की भी गोपनीय जांच हो सकती है।
आने वाले दिनों में रिंग रोड और शहर के अन्य हिस्सों में भी पीला पंजा चल सकता है।
इस कार्रवाई ने जनता के बीच एक उम्मीद जगाई है कि शहर के अस्तित्व को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जा सकेगा। हालांकि, चुनौती अब उन 'सफेदपोश' चेहरों को बेनकाब करने की है जो फाइलों के पीछे बैठकर इन कब्जों की स्क्रिप्ट लिखते हैं।

