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वाटर एटीएम
छत्तीसगढ़

गर्मी में पानी को तरस रहे लोग, लाखों के वाटर एटीएम सालों से ठप

महासमुंद में 2017 में नगर पालिका द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए आरओ वाटर एटीएम आज पूरी तरह बंद पड़े हैं। कचहरी चौक, बस स्टैंड और बाजार क्षेत्रों में लगाई गई ये मशीनें शुरुआत से ही नियमित रूप से संचालित नहीं हो सकीं और अब जंग खाकर खराब हो चुकी हैं। भीषण गर्मी में आम लोगों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जबकि इस योजना का उद्देश्य सस्ती दरों पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था। रखरखाव और निगरानी की कमी के कारण पूरा सिस्टम विफल हो गया है। स्थानीय लोगों में नाराजगी है और वे प्रशासन से मशीनों को पुनः चालू करने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
20 Apr 2026, 07:40 PM
महासमुंद
महासमुंद शहर को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित करने और आम नागरिकों को सस्ती दरों पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2017 में नगर पालिका द्वारा लगाए गए लाखों के आरओ (RO) वाटर एटीएम आज बंद पड़े हैं। लाखों रुपये की लागत से स्थापित ये मशीनें कई वर्षों से बंद पड़ी हैं और अब धूल, जंग और टूट-फूट के कारण कबाड़ में तब्दील होती जा रही हैं। दूसरी ओर, भीषण गर्मी में शहर के लोग अब भी पीने के पानी के लिए परेशान हैं।
2017 में शुरू हुई योजना
नगर पालिका द्वारा शहर के प्रमुख स्थानों—जैसे कचहरी चौक, बस स्टैंड,  पर वाटर एटीएम इस उद्देश्य से लगाए गए थे कि राहगीरों, यात्रियों, मजदूरों और आम नागरिकों को मात्र 1 से 5 रुपये में स्वच्छ और ठंडा पेयजल आसानी से उपलब्ध हो सके। लेकिन वास्तविकता यह रही कि यह योजना शुरुआत से ही ठीक तरह से चालू नहीं हो पाई। कई मशीनें स्थापना के कुछ ही समय बाद बंद हो गईं, जबकि कुछ स्थानों पर आज तक कभी नियमित रूप से संचालन ही नहीं हो पाया।
लाखों की लागत, लेकिन परिणाम शून्य
इन परियोजनाओं पर भारी-भरकम बजट खर्च किया गया, लेकिन उचित रखरखाव, तकनीकी निगरानी और संचालन की स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण पूरा सिस्टम विफल हो गया। कई वाटर एटीएम के आसपास गंदगी, टूटी संरचनाएं और जंग लगी मशीनें इस बात की गवाही दे रही हैं कि सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हो सका।
वाटर एटीएम

दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
एक ओर नगर पालिका प्रशासन शहर को जल-सुविधा युक्त और स्मार्ट सिटी मॉडल बनाने के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर पहले से स्थापित मूलभूत सुविधाओं को चालू रखने में भी असफल दिखता है।बेलसोंडा फिल्टर प्लांट से महानदी के पानी को शुद्ध कर टंकियों में सप्लाई करने की योजनाएं कागजों पर तो सक्रिय नजर आती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। कई इलाकों में आज भी लोगों को नियमित जलापूर्ति नहीं मिल रही है।
जनता में नाराजगी, जिम्मेदारी तय नहीं
  • स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और यात्रियों का कहना है कि वाटर एटीएम लगाने के बाद प्रशासन ने कभी इसकी स्थिति की सुध नहीं ली।
  • कई स्थानों पर बिजली कनेक्शन तक नहीं लगाया गया
  • कहीं पानी की आपूर्ति ही शुरू नहीं हुई
  • तो कहीं मशीनें खराब होने के बाद उनकी मरम्मत ही नहीं कराई गई
  • गर्मी के मौसम में बस स्टैंड जैसे व्यस्त स्थानों पर यात्रियों को मजबूरी में महंगा बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
उठते गंभीर सवाल
  • इस पूरी स्थिति ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं
  • 2017 से बंद पड़ी मशीनों को अब तक चालू क्यों नहीं किया गया
  • क्या इन योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना था
  • जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई
  • जब पुरानी योजनाएं ही असफल हैं, तो नई जल योजनाओं पर जनता कैसे भरोसा करे
भविष्य पर भी खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह लापरवाही जारी रही, तो बेलसोंडा फिल्टर प्लांट और महानदी आधारित जल वितरण व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इससे आने वाले समय में शहर की जल समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है। महासमुंद में बंद पड़े वाटर एटीएम केवल निष्क्रिय मशीनें नहीं हैं, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, योजना की कमी और जवाबदेही के अभाव का प्रतीक बन चुके हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन मशीनों की तकनीकी जांच कर इन्हें पुनः चालू किया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और एक स्थायी मेंटेनेंस व्यवस्था लागू की जाए। अन्यथा स्मार्ट सिटी और शुद्ध पेयजल जैसे वादे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे और आम जनता इसी तरह पानी के लिए परेशान होती रहेगी।
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